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ITR में बैंक ब्याज छिपाना पड़ा भारी! (IMG: Pinterest)
New Delhi: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करते समय बैंक खाते में मिले ब्याज की जानकारी देना भूलना एक नौकरीपेशा व्यक्ति को भारी पड़ गया। इनकम टैक्स विभाग ने पहले रिटर्न में बैंक ब्याज की जानकारी नहीं देने पर उसके खिलाफ 3 लाख रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगा दिया। मामला तब और गंभीर हो गया, जब असेसमेंट के दौरान विभाग ने पुराने रिटर्न की जांच शुरू कर दी। हालांकि, इस पूरे मामले में टैक्सपेयर ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए नोटिस मिलने के बाद संशोधित रिटर्न दाखिल किया और छूटे हुए 4.49 लाख रुपये के बैंक ब्याज को अपनी आय में शामिल कर लिया।
यह मामला सिद्धार्थ गुप्ता बनाम इनकम टैक्स ऑफिसर (ITO) का है। सिद्धार्थ गुप्ता नौकरीपेशा हैं और उन्होंने असेसमेंट ईयर 2020-21 के लिए 16 अक्टूबर 2020 को अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल किया था। इस रिटर्न में उन्होंने अपनी कुल आय 81.35 लाख रुपये घोषित की थी। बाद में इनकम टैक्स विभाग को अपने इनसाइट पोर्टल पर सिद्धार्थ गुप्ता के बैंक ब्याज और कार खरीदने से संबंधित जानकारी मिली। विभाग को उपलब्ध जानकारी और उनके दाखिल किए गए रिटर्न में अंतर नजर आया। इसके बाद आयकर विभाग ने इनकम टैक्स एक्ट की धारा 147 के तहत उनके पुराने मामले को दोबारा खोलने की प्रक्रिया शुरू की।
सिद्धार्थ गुप्ता ने नए रिटर्न में पहले छूट गए 4.49 लाख रुपये के बैंक ब्याज को भी अपनी आय में शामिल कर लिया। इस तरह उनकी घोषित कुल आय बढ़कर 85.84 लाख रुपये हो गई। इसके बाद असेसिंग ऑफिसर ने उनके नए रिटर्न में दिखाई गई आय को स्वीकार कर लिया। अधिकारी की ओर से कोई अतिरिक्त आय नहीं जोड़ी गई। यानी टैक्सपेयर ने बैंक ब्याज से हुई अतिरिक्त आय की जानकारी दे दी थी और उस पर लागू टैक्स भी चुका दिया था। हालांकि, आयकर विभाग ने पहले दाखिल किए गए रिटर्न में बैंक ब्याज की जानकारी नहीं देने को लेकर धारा 270A के तहत जुर्माना लगा दिया। यह रकम 3 लाख रुपये से ज्यादा थी।
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इनकम टैक्स विभाग की ओर से लगाए गए जुर्माने के खिलाफ सिद्धार्थ गुप्ता ने पहले कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स (अपील) यानी CIT(A) के सामने अपील की। हालांकि, वहां से उन्हें राहत नहीं मिली और जुर्माने का आदेश बरकरार रहा। इसके बाद उन्होंने दिल्ली स्थित इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) का रुख किया। यहां उन्होंने विभाग की कार्रवाई को चुनौती देते हुए अपनी दलीलें रखीं। टैक्सपेयर की ओर से कहा गया कि उनका मूल ITR कोरोना महामारी के दौरान दाखिल किया गया था। बाद में जब विभाग की ओर से नोटिस मिला तो उन्होंने बैंक ब्याज की पूरी जानकारी नए रिटर्न में शामिल कर दी और उस पर लागू टैक्स भी जमा कर दिया।
दिल्ली ITAT ने इस मामले में जुर्माना रद्द करने के पीछे दो प्रमुख वजहों को आधार बनाया। पहली वजह यह थी कि इनकम टैक्स विभाग की ओर से जारी नोटिस में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि टैक्सपेयर ने इनकम टैक्स एक्ट की धारा 270A(9) के किस प्रावधान का उल्लंघन किया है। ट्रिब्यूनल के मुताबिक, किसी व्यक्ति पर जुर्माना लगाने से पहले उसे यह स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि उसके खिलाफ किस आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
इस संबंध में ITAT ने दिल्ली हाई कोर्ट के श्नाइडर इलेक्ट्रिक (Schneider Electric) मामले में दिए गए फैसले का भी हवाला दिया। इस फैसले के आधार पर नोटिस में आरोप और जुर्माने के कानूनी आधार को स्पष्ट करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। दूसरी वजह टैक्सपेयर की ओर से नोटिस मिलने के बाद उठाया गया कदम था। सिद्धार्थ गुप्ता ने विभाग की ओर से जानकारी मांगे जाने के बाद अपने नए रिटर्न में छूटे हुए बैंक ब्याज को शामिल कर लिया था। उन्होंने अपनी कुल आय बढ़ाई और अतिरिक्त आय पर लागू टैक्स भी चुका दिया था।
इनकम टैक्स रिटर्न में आय कम दिखाने या गलत जानकारी देने के मामलों में आयकर विभाग धारा 270A के तहत जुर्माना लगा सकता है। यह प्रावधान असेसमेंट ईयर 2017-18 से लागू है। इस धारा के तहत सामान्य तौर पर कम रिपोर्ट की गई आय (Under-reporting of Income) पर संबंधित टैक्स की रकम का 50 प्रतिशत जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं, अगर मामला गलत रिपोर्टिंग (Misreporting of Income) का पाया जाता है तो जुर्माने की दर संबंधित टैक्स की रकम का 200 प्रतिशत तक हो सकती है।
Location : New Delhi
Published : 3 November 2026, 3:20 PM IST
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