क्या Ola, Uber और फूड डिलीवरी करना होगा महंगा? जानिए नए नियमों से गिग वर्कर्स को क्या मिलेगा फायदा

गिग और प्लेटफॉर्म वर्करों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए सरकार नए फंड मॉडल पर विचार कर रही है।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 6 September 2026, 5:03 PM IST
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New Delhi: आज के समय में कैब चलाने से लेकर खाना पहुंचाने और ऑनलाइन सामान डिलीवर करने तक लाखों लोग ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कमाई कर रहे हैं। इन्हें गिग वर्कर्स कहा जाता है। अब इन कामगारों को सामाजिक सुरक्षा देने की तैयारी तेज हो रही है। लेकिन इससे पहले सरकार के सामने एक बड़ा सवाल है- कंपनियों से सामाजिक सुरक्षा के लिए पैसा आखिर किस हिसाब से लिया जाए?

दो तरीकों पर हो रहा विचार

सरकार अभी दो विकल्पों पर विचार कर रही है। पहला तरीका है एग्रीगेटर कंपनियों के सालाना टर्नओवर का एक हिस्सा सोशल सिक्योरिटी फंड के लिए इकट्ठा करना। दूसरा तरीका है कंपनियों द्वारा अपने गिग वर्करों को किए गए कुल पेमेंट के आधार पर योगदान तय करना। इस फैसले का अलग-अलग प्लेटफॉर्म कंपनियों की ऑपरेटिंग कॉस्ट पर काफी असर पड़ सकता है।

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कैब और बाइक कंपनियों पर ज्यादा बोझ?

जानकारों का मानना ​​है कि अगर योगदान वर्करों को किए गए पेमेंट के आधार पर तय किया जाता है, तो कैब, ऑटो-रिक्शा और बाइक-टैक्सी सर्विस देने वाले प्लेटफॉर्म पर बहुत ज्यादा असर पड़ सकता है। ये सर्विस रोजाना हजारों या लाखों राइड्स की सुविधा देती हैं जिनमें छोटी और लंबी दोनों तरह की दूरियां शामिल होती हैं। हालांकि एक राइड का किराया कम हो सकता है, लेकिन राइड्स की संख्या बहुत ज्यादा होती है। इसलिए पेमेंट-आधारित योगदान मॉडल से इन कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।

90 दिन काम किया तो मिल सकता है लाभ

'कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020' में गिग और प्लेटफॉर्म वर्करों के लिए एक सोशल सिक्योरिटी फंड का प्रावधान है। इन नियमों के तहत एक गिग वर्कर इस स्कीम के फायदों के लिए तब पात्र हो जाता है जब वह एक फाइनेंशियल ईयर में किसी एक एग्रीगेटर के लिए कम से कम 90 दिन काम करता है या अलग-अलग एग्रीगेटर्स के लिए कुल मिलाकर 120 दिन काम करता है।

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कितना पेमेंट जरूरी है?

'कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी' की धारा 114(4) के तहत एग्रीगेटर कंपनियों को अपने सालाना टर्नओवर का 1% से 2% के बीच योगदान करना जरूरी है। हालांकि, यह रकम वर्करों को किए गए कुल पेमेंट के 5% से ज्यादा नहीं हो सकती। सरकार एक वैकल्पिक मॉडल पर भी विचार कर रही है जिसमें योगदान की सीमा वर्करों को किए गए कुल पेमेंट के अधिकतम 5% तक सीमित होगी।

फैसला लाखों कामगारों के लिए अहम

सरकार द्वारा तय किया गया फॉर्मूला न सिर्फ कंपनियों पर बल्कि गिग वर्करों के लिए सोशल सिक्योरिटी के ढांचे पर भी असर डालेगा। इसलिए योगदान तय करने के तरीके को पूरे सिस्टम का सबसे अहम पहलू माना जाता है।

Location :  New Delhi

Published :  6 September 2026, 5:01 PM IST

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