‘डॉक्टर नहीं हैं, बाहर ले जाओ’ बदायूं में मरीजों की जिंदगी से कैसे हो रहा है खिलवाड़? स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

बदायूं जिला अस्पताल में लंबे समय से सर्जन की कमी बताई जा रही है। इसके चलते गंभीर चोट और जलने वाले मरीजों को कई बार प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है। वजीरगंज में गैस रिसाव से झुलसे एक व्यक्ति के मामले ने यह समस्या फिर सामने ला दी है।

Post Published By: Komal Chauhan
Updated : 6 September 2026, 5:24 PM IST
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Budaun: जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। बदायूं के जिला अस्पताल में लंबे समय से सर्जन डॉक्टर का पद खाली बताया जा रहा है। इसके चलते गंभीर चोट, जलने और ऑपरेशन की जरूरत वाले मरीजों को इलाज के लिए बड़े अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। अस्पताल में मरीजों को प्राथमिक उपचार देने के बाद कई मामलों में बरेली या दूसरे हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया जाता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी के साथ आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ रहा है।

वजीरगंज में गैस रिसाव से घर में लगी आग

ताजा मामला वजीरगंज कस्बे के वार्ड नंबर 13 से सामने आया है। यहां रहने वाले 45 वर्षीय प्रभात शर्मा अपने घर में चाय बना रहे थे। इसी दौरान गैस सिलेंडर में अचानक रिसाव होने से आग लग गई। गैस रिसाव के कारण देखते ही देखते आग तेजी से फैल गई। प्रभात शर्मा आग की चपेट में आ गए और गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे के बाद घर में अफरा-तफरी मच गई।

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परिजनों ने किसी तरह बुझाई आग

घटना के समय घर में मौजूद परिजनों को जब हादसे की जानकारी हुई तो उन्होंने तुरंत मौके पर पहुंचकर आग बुझाने की कोशिश शुरू की। काफी प्रयास के बाद आग पर काबू पाया गया। हालांकि, तब तक प्रभात शर्मा काफी झुलस चुके थे। परिजन उन्हें तत्काल उपचार के लिए जिला अस्पताल बदायूं लेकर पहुंचे। वहां उनका इलाज किया जा रहा है। हादसे के बाद परिवार के लोगों में चिंता का माहौल है।

सर्जन की कमी से बढ़ रही मरीजों की परेशानी

स्थानीय लोगों के मुताबिक, जिला अस्पताल में लंबे समय से सर्जन डॉक्टर की कमी बनी हुई है। इसके कारण ऐसे मरीजों को पर्याप्त उपचार नहीं मिल पाता, जिन्हें तत्काल सर्जरी या विशेषज्ञ इलाज की जरूरत होती है। बर्न केस, गंभीर दुर्घटना में घायल मरीज और ऑपरेशन की आवश्यकता वाले मरीजों को कई बार प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर भेज दिया जाता है। मरीजों को बरेली समेत अन्य बड़े अस्पतालों के लिए रेफर किया जाता है।

इलाज के लिए दूसरे शहर जाने को मजबूर मरीज

जिला अस्पताल से रेफर किए जाने के बाद मरीजों के सामने सबसे बड़ी समस्या दूसरे शहर तक पहुंचने की होती है। गंभीर हालत में मरीज को लंबी दूरी तक ले जाना परिजनों के लिए चुनौती बन जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर इसका ज्यादा असर पड़ता है। निजी अस्पतालों में इलाज महंगा होने के कारण कई परिवारों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। गंभीर मरीजों को समय पर विशेषज्ञ उपचार न मिलने की चिंता भी बनी रहती है।

स्थायी सर्जन की तैनाती की मांग

जिले के लोगों और मरीजों के परिजनों ने जिला अस्पताल में जल्द स्थायी सर्जन की तैनाती की मांग की है। उनका कहना है कि जिला अस्पताल जिले के बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल है, इसलिए यहां जरूरी विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

लोगों का कहना है कि अगर अस्पताल में सर्जन की तैनाती होती है तो गंभीर मरीजों को शुरुआती स्तर पर ही बेहतर उपचार मिल सकता है और कई मरीजों को दूसरे शहरों में रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद

वजीरगंज की घटना ने एक बार फिर जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता के सवाल को सामने ला दिया है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि स्वास्थ्य विभाग इस समस्या का संज्ञान लेकर जल्द जरूरी कदम उठाएगा।

Location :  Budaun

Published :  6 September 2026, 5:24 PM IST

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