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सोने-चांदी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। अमेरिकी सरकार शटडाउन की चिंता और कमजोर आर्थिक डेटा के चलते ग्लोबल बुलियन मार्केट में रिकवरी आई, जिसका असर MCX पर भी दिखा, जहां सोना-चांदी 3 से 6 प्रतिशत तक चढ़े।
सोने-चांदी की कीमतों में तेज उछाल
New Delhi: मंगलवार को कीमती धातुओं के बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली। ग्लोबल बुलियन मार्केट में मजबूत रिकवरी के असर से मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतें तेज़ी से बढ़ीं। अमेरिकी सरकार के आंशिक शटडाउन और इस हफ्ते बड़े आर्थिक आंकड़ों की कमी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिससे सुरक्षित निवेश के तौर पर सोना-चांदी की मांग बढ़ी।
MCX पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना करीब 3 प्रतिशत की छलांग के साथ 1,48,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला। पिछले सत्र में इसका बंद भाव 1,41,669 रुपये था। वहीं चांदी ने भी तेज रफ्तार पकड़ी। मार्च फ्यूचर्स वाली चांदी करीब 4 प्रतिशत उछलकर 2,45,711 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुली, जबकि पिछले सत्र में यह 2,36,261 रुपये पर बंद हुई थी। शुरुआती कारोबार में चांदी की तेजी 6 प्रतिशत तक पहुंच गई।
ग्लोबल मार्केट में भी सोना-चांदी ने दमदार वापसी की। पिछले सत्र में लगभग एक महीने के निचले स्तर तक फिसलने के बाद सोने की कीमतों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई। स्पॉट गोल्ड 3.7 प्रतिशत बढ़कर 4,837.16 डॉलर प्रति औंस पहुंच गया, जबकि अप्रैल डिलीवरी वाले अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 4.5 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,859.30 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करते दिखे। चांदी की कीमतों में भी वैश्विक स्तर पर मजबूत उछाल देखने को मिला। स्पॉट सिल्वर 5.9 प्रतिशत चढ़कर 84.09 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
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विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका में आंशिक सरकारी शटडाउन के कारण इस हफ्ते अहम आर्थिक आंकड़े जारी नहीं हो पाए हैं। इससे बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाकर सुरक्षित निवेश की ओर लौट रहे हैं, जिसका सीधा फायदा सोना और चांदी को मिल रहा है।
Gold Price: सोना क्यों बन रहा निवेशकों की पहली पसंद? इकोनॉमिक सर्वे ने खोले राज
विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अमेरिकी वित्तीय हालात, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें और डॉलर की चाल सोने-चांदी की दिशा तय करेंगी।
अगर वैश्विक आर्थिक या भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ते हैं, तो सोना-चांदी को और सपोर्ट मिल सकता है। हालांकि ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली तेजी को सीमित भी कर सकती है।