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बिहार के सीएम नीतिश कुमार के एमएलसी पद से इस्तीफे को लेकर जेडीयू का बड़ा बयान सामने आया है। जेडीयू विधायक अनंत कुमार सिंह ने इस बाबत बड़ी जानकारी दी है जिसके बाद राजनीति के गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
बिहार सीएम नीतीश कुमार (इमेज सोर्स- इंटरनेट)
पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एमएलसी पद से इस्तीफे को लेकर कई कयास लगाये जा रहे हैं। लेकिन उनकी पार्टी जेडीयू ने इस कयास पर बड़ा बयान दिया है।
जानकारी के अनुसार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए और संवैधानिक प्रावधान के अनुसार 30 मार्च तक उन्हें त्यागपत्र दे देना है। उन्होंने इस साल 5 मार्च को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के अपने फैसले की घोषणा की थी।
जेडीयू विधायक अनंत कुमार सिंह ने बताया कि नीतीश कुमार सोमवार को बिहार विधान परिषद (एमएलसी) के पद से इस्तीफा देने जा रहे हैं लेकिन उनकी पार्टी के कई नेता चाहते थे कि नीतीश कुमार ऐसा कदम न उठाएं।
दरअसल, हाल ही में नीतीश कुमार को जनता दल (यूनाइटेड) का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी चुना गया है। उनके खिलाफ किसी अन्य नेता ने नामांकन नहीं किया, इसलिए उन्हें निर्विरोध अध्यक्ष घोषित कर दिया गया। इस नई जिम्मेदारी के बाद उनका यह इस्तीफा राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
1985 में एक विधायक के रूप में अपनी यात्रा शुरू करने और बाद में अटल बिहरी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्य करने के बाद, वह पहली बार 2005 में एनडीए के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में बिहार के मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए।
हालांकि, 2013 से 2024 तक वे बारी-बारी से भाजपा और महागठबंधन (राजद और कांग्रेस) के बीच आते-जाते रहे। इन बार-बार होने वाले बदलावों के बावजूद, उनका राजनीतिक अस्तित्व बेजोड़ बना रहा; हाल ही में, 2025 में उन्होंने पांचवीं बार जबरदस्त चुनावी जीत हासिल की और रिकॉर्ड तोड़ते हुए दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
राजनीतिक जानकारों की माने तो नीतीश कुमार के इस फैसले से बिहार में भाजपा की भूमिका और मजबूत हो सकती है। साथ ही भविष्य में मुख्यमंत्री पद को लेकर भी नए समीकरण बन सकते हैं। कुल मिलाकर, सीएम नीतीश कुमार का विधान परिषद से इस्तीफा सिर्फ एक औपचारिक कदम नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़े राजनीतिक बदलावों की संभावना भी छिपी हुई है।
वहीं आरजेडी के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने दावा किया था कि नितीश कुमार की राज्यसभा जाने की कोई इच्छा नहीं थी, बल्कि उन्हें जेडीयू के मुख्य सहयोगी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दबाव में यह फैसला लेना पड़ा। उन्होंने कहा कि बीजेपी जेडीयू को खत्म करने की कोशिश कर रही है।