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झारखंड पुलिस वेतन घोटाला(Source: Google)
Ranchi: झारखंड के बोकारो और हजारीबाग के बाद अब चाईबासा कोषागार से अवैध वेतन निकासी मामले में अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी जांच की रफ्तार तेज कर दी है। सूक्ष्म स्तर पर की जा रही इस छानबीन में घोटाले की चौंकाने वाली परतें सामने आ रही हैं, जिसमें पुलिस विभाग के भीतर ही चल रहे बड़े खेल का पर्दाफाश हुआ है।
जांच में पता चला है कि वेतन पोर्टल, बैंक और कोषागार से जुड़ी सारी वित्तीय अनियमितताएं ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर (DDO) के रजिस्टर्ड मोबाइल पर आए OTP के जरिए की गईं। जिलों में आमतौर पर डीएसपी स्तर के अधिकारी डीडीओ का प्रभार संभालते हैं। फील्ड ड्यूटी और कानून-व्यवस्था में व्यस्तता के कारण, अधिकारियों ने विश्वास में आकर अपना मोबाइल नंबर और ओटीपी लेखापालों (Accountants) को उपलब्ध करा दिए, जिसका उन्होंने गलत फायदा उठाया।
लेखापालों ने मास्टर लॉगिन का उपयोग कर सेवानिवृत्त हो चुके पुलिसकर्मियों की जन्मतिथि में 2 से 4 साल की हेराफेरी की। इससे वे पोर्टल पर 'कार्यरत' नजर आने लगे। इसके बाद, उनके नाम पर बने वेतन को पुलिसकर्मी के बजाय लेखापालों ने अपने रिश्तेदारों और सहयोगियों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया। हैरानी की बात यह है कि एक तरफ कर्मी पेंशन लेता रहा और दूसरी तरफ उसके नाम पर अवैध रूप से वेतन भी निकलता रहा।
बोकारो एसपी कार्यालय के गिरफ्तार लेखापाल कौशल कुमार पांडेय और हजारीबाग के शंभू कुमार से हुई पूछताछ के बाद एसआईटी को इस मास्टर प्लान की पूरी जानकारी मिली है। अब CID इस बात की जांच कर रही है कि क्या अन्य जिलों में भी इसी तरह से ओटीपी और डिजिटल लॉगिन का दुरुपयोग कर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया है।
Location : Ranchi
Published : 1 May 2026, 7:25 AM IST
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