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उत्तर-पूर्व भारत की सड़कें दर्शाती हैं असली सिविक शान। जाम में भी कोई धक्का-मुक्की नहीं, पैदल यात्रियों का सम्मान, साफ-सफाई का ध्यान। नियम नहीं, बल्कि दिल से निभाया गया अनुशासन। भारत के बाकी हिस्सों के लिए सीख और प्रेरणा।
उत्तर-पूर्व में ट्रैफिक जाम में भी नजर आया अनुशासन
New Delhi: भारत के अधिकांश हिस्सों में ट्रैफिक जाम और सड़क अनुशासन अक्सर चिंता का विषय बनते हैं। लेकिन उत्तर-पूर्वी राज्यों की सड़कें इन मानकों से पूरी तरह अलग हैं। हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो ने इस क्षेत्र के नागरिक अनुशासन और शहरी सभ्यता की एक अलग ही तस्वीर पेश की।
वीडियो में दिखाया गया है कि लंबा जाम लगा हुआ है, फिर भी कोई गाड़ी ओवरटेक करने की कोशिश नहीं कर रहा। सभी गाड़ियां अपने-अपने लेन में खड़ी हैं। पैदल यात्रियों के लिए साफ वॉकवे बनाई गई हैं, जिस पर लोग सुरक्षित चलते हुए दिखाई देते हैं। सड़क किनारे कचरा नहीं है और हर कोई अपनी साफ-सफाई का ध्यान रख रहा है।
यह सिर्फ नियमों का पालन नहीं है, बल्कि यहां के लोगों में अपने शहर और पर्यावरण के प्रति गहरी जिम्मेदारी झलकती है। नॉर्थ ईस्ट के नागरिकों में यह नागरिक भावना इतनी जमी हुई है कि इसे “सिविक शान” कहा जा सकता है।
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उत्तर-पूर्वी राज्यों में शिक्षा और सामाजिक जागरूकता का स्तर अपेक्षाकृत बेहतर माना जाता है। रिसर्च और लोकल रिपोर्ट्स बताते हैं कि यहां के लोग सामूहिक रूप से अपनी जगह को स्वच्छ और व्यवस्थित रखने का प्रयास करते हैं।
जब भारी ट्रैफिक होता है, तब भी लोग धैर्य और संयम बनाए रखते हैं। कोई धक्का-मुक्की नहीं करता और पैदल यात्री सुरक्षित रहते हैं। यह आदर्श केवल सड़क नियमों का पालन नहीं है, बल्कि समाज में सह-अस्तित्व और नागरिक जिम्मेदारी का प्रतीक है।
"Why is North-East India different?" ❣️
People here actually follow lane discipline, respect pedestrian paths instead of blocking them and keep their surroundings clean. It's not just about rules, but also civic sense. pic.twitter.com/wq1B7lQbL1
— Suraj Kumar Bauddh (@SurajKrBauddh) January 6, 2026
भारत के अन्य हिस्सों में ट्रैफिक जाम में धक्कामुक्की, ओवरटेकिंग और नियमों की अनदेखी आम है। वहीं, उत्तर-पूर्व की ये मिसाल दिखाती है कि अनुशासन और सामाजिक जागरूकता से शहर कितने बेहतर और शांतिपूर्ण बन सकते हैं।
सामूहिक जिम्मेदारी, पर्यावरण की रक्षा और पैदल यात्रियों के प्रति सम्मान यहां की संस्कृति का हिस्सा हैं। नॉर्थ ईस्ट के लोग यह समझते हैं कि सड़क केवल वाहन चलाने की जगह नहीं, बल्कि हर नागरिक का साझा संसाधन है।
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यहां की सड़क व्यवस्था दिखाती है कि “नियमों का पालन” केवल कागजों में नहीं होता। यह नागरिकों की सोच, संस्कृति और आपसी समझ का परिणाम होता है। ऐसे उदाहरण पूरे भारत के लिए प्रेरणा हैं कि यदि नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझें और सामाजिक अनुशासन अपनाएं, तो जाम और अराजकता जैसी समस्याएं कम हो सकती हैं।
नॉर्थ ईस्ट की सड़कों पर लोगों का यह संयम, पैदल यात्रियों का सम्मान और साफ-सफाई का ध्यान स्थानीय प्रशासन के प्रयासों के साथ-साथ समाज में व्याप्त जागरूकता का प्रतीक है।