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जस्टिस सूर्यकांत आज अपने गांव पट पहुंच रहे हैं, जहां उनका भव्य सम्मान समारोह होगा। बड़े भाई रिशांत जी ने साझा कीं उनके बचपन, पढ़ाई और संघर्ष की यादें। सरकारी स्कूल से देश की न्यायिक शीर्ष जिम्मेदारी तक का सफर गांव के लिए गर्व का विषय बना है।
Hansi: भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत शुक्रवार को हांसी पहुंच चुके हैं। उनके हांसी कोर्ट परिसर पहुंचने पर हांसी बार एसोसिएशन की ओर से उनका भव्य और ऐतिहासिक स्वागत किया गया।
डाइनामाइट न्यूज़ की टीम हरियाणा के हांसी जिले के पेटवार गांव में मौजूद है, जो एक ऐतिहासिक पल को कैमरे में कैद कर रही है उनके आगमन को लेकर पूरे गांव में उत्साह और गर्व का माहौल है। गांव में उनके सम्मान के लिए भव्य समारोह की तैयारियां चल रही हैं, जिसमें परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और गांव के लोग बड़ी संख्या में शामिल होने वाले हैं। इस अवसर पर डायनामिक न्यूज़ से खास बातचीत में जस्टिस सूर्यकांत के बड़े भाई ऋषिकांत जी ने उनके जीवन से जुड़ी कई अहम और भावुक यादें साझा कीं।
ऋषिकांत जी ने बताया कि जस्टिस सूर्यकांत की शुरुआती शिक्षा गांव के उसी सरकारी स्कूल में हुई थी, जहां आज उनका सम्मान समारोह आयोजित किया जा रहा है। उस समय यह स्कूल हाई स्कूल था। जस्टिस सूर्यकांत ने यहीं से दसवीं की परीक्षा पास की और इसी मैदान में बचपन के दिन खेलते हुए बिताए। आज उसी जगह उनका सम्मान होना पूरे गांव के लिए भावुक और गर्व का क्षण है।
बचपन के बारे में बात करते हुए ऋषिकांत जी ने कहा कि सूर्यकांत शुरू से ही बेहद तेज और बुद्धिमान थे। उनकी याददाश्त बहुत मजबूत रही है। आज भी उन्हें अपने स्कूल के दोस्त, क्लासमेट्स और बचपन की बातें साफ-साफ याद हैं। गांव में पले-बढ़े सूर्यकांत ने हमेशा अपनी जड़ों से जुड़ाव बनाए रखा।
सम्मान समारोह को लेकर ऋषिकांत जी ने खास बात बताई कि यह आयोजन किसी सरकारी फंड या योजना से नहीं हो रहा है। गांव के लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई से यह कार्यक्रम आयोजित किया है। उनके अनुसार यह सम्मान जस्टिस सूर्यकांत की उपलब्धियों के साथ-साथ गांव की सामूहिक भावना और गर्व को भी दर्शाता है।
उन्होंने बताया कि जस्टिस सूर्यकांत हर साल कम से कम एक बार गांव जरूर आते हैं। परिवार की ओर से चलाए जा रहे एक छोटे ट्रस्ट के कार्यक्रमों में भी वे नियमित रूप से शामिल होते हैं, जहां गांव के लड़के-लड़कियों को शिक्षा के क्षेत्र में सम्मानित किया जाता है।
जब उनसे पूछा गया कि इतने ऊंचे पद तक पहुंचने की प्रेरणा उन्हें कहां से मिली, तो ऋषिकांत जी ने साफ कहा कि यह किसी दबाव या पारिवारिक अपेक्षा का नतीजा नहीं था। सूर्यकांत परिवार में पहले ग्रेजुएट थे और लॉ की पढ़ाई के बाद उन्होंने हिसार में वकालत शुरू की। उन्होंने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर यह मुकाम हासिल किया।
ऋषिकांत जी ने बताया कि उन्होंने खुद देखा है कि वकालत के शुरुआती दिनों में सूर्यकांत देर रात दो-दो बजे तक पढ़ाई किया करते थे। परिवार में शिक्षा की मजबूत परंपरा जरूर रही है। उनके परदादा शिक्षक थे, पिता गांव के सरपंच रहे और संस्कृत के विद्वान थे, जिन्हें हरियाणा का प्रतिष्ठित सूरदास सम्मान भी मिला था। लेकिन जस्टिस सूर्यकांत की सफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण उनकी खुद की कड़ी मेहनत और अनुशासन रहा।
परिवार के बारे में बताते हुए ऋषिकांत जी ने कहा कि उनकी एक बड़ी बहन हैं, जो जींद में रहती हैं। भाइयों में वे स्वयं रिटायर्ड टीचर हैं, एक भाई भिवानी में टीबी और छाती रोग विशेषज्ञ डॉक्टर हैं और एक अन्य भाई हरियाणा में इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग डिपार्टमेंट से रिटायर्ड शिक्षक हैं। जस्टिस सूर्यकांत परिवार में सबसे छोटे हैं, लेकिन उपलब्धियों में सबसे ऊंचे शिखर पर पहुंचे हैं।