रुद्रप्रयाग में खनन माफिया अलकनंदा और मंदाकिनी जैसी नदियों का विनाश कर रहे हैं। 8 निजी क्रेशर और 4 ई-टेंडरिंग पट्टों के जरिए अवैध खनन, रॉयल्टी हेराफेरी और पर्यावरणीय खतरा बढ़ रहा है। प्रशासन की मिलीभगत का आरोप।

रुद्रप्रयाग में खनन माफिया का खुला खेल (Img- Internet)
Rudraprayag: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में खनन माफिया की गतिविधियां चरम पर हैं। अलकनंदा और मंदाकिनी जैसी जीवनदायिनी नदियों में निर्धारित सीमा से अधिक खनन किया जा रहा है। नतीजा यह कि नदियां खुर्द-बुर्द हो रही हैं, सड़कें कमजोर हो रही हैं और पर्यावरणीय संकट बढ़ रहा है।
जिले में कुल 8 निजी क्रेशर और 4 ई-टेंडरिंग खनन पट्टे चल रहे हैं। लेकिन इनकी आड़ में निर्धारित मात्रा से कहीं ज्यादा खनन हो रहा है। भंडारण सीमा से अधिक माल रखा जा रहा है और रॉयल्टी में भारी हेराफेरी हो रही है। इससे नदियों का प्रवाह बाधित हो रहा है और बाढ़ का खतरा भी बढ़ गया है।
सूत्रों के अनुसार, राजस्व विभाग, खनन विभाग, पुलिस और वन विभाग के अधिकारी भी इस काले कारोबार में शामिल हैं। स्थानीय निवासी बताते हैं कि माफिया दिन-रात मशीनें चलाते हैं, लेकिन अधिकारी आंखें मूंदे रहते हैं। करोड़ों रुपये की कमाई में सभी का हिस्सा है।
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जून 2024 में रुद्रप्रयाग प्रशासन ने अवैध खनन पर कार्रवाई की थी और एक स्टोन क्रेशर को सीज कर 23 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसके बावजूद कारोबार जारी है। जुलाई 2025 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गंगा नदी पर अवैध खनन के लिए 48 स्टोन क्रेशर बंद करने के आदेश दिए थे।
नदियों और सड़कें खतरे में
सीपीसीबी की रिपोर्ट में गंगा नदी पर अवैध खनन की पुष्टि हुई है। रुद्रप्रयाग में हाल ही में ऊखीमठ में खनन और राजस्व विभाग ने कुछ कार्यवाही की, लेकिन यह सिर्फ दिखावा साबित हुई। लगातार खनन से नदियों की जैव विविधता, प्रवाह और आसपास के क्षेत्रों में पर्यावरणीय संकट बढ़ रहा है।
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पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मार्च 2025 में बड़े पैमाने पर अवैध खनन का मुद्दा उठाया था। अब जनता और पर्यावरण कार्यकर्ताओं की मांग है कि सरकार और प्रशासन इस माफिया राज को तुरंत रोकें। यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो देवभूमि का पर्यावरणीय विनाश निश्चित है।