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रामनगर में बाघ के हमले में 60 वर्षीय महिला की मौत के बाद प्रशासन अलर्ट हो गया। पिंजरा लगाकर और ट्रेंकुलाइजेशन की अनुमति लेकर बाघ को सुरक्षित पकड़ने की तैयारी की जा रही है। हाथियों और कैमरा ट्रैप से लगातार निगरानी जारी।
बाघ के हमले के बाद प्रशासन अलर्ट
Ramnagar: उत्तराखंड के रामनगर के कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में शुक्रवार दोपहर एक दर्दनाक घटना घटी। ढेला रेंज के साँवल्दे गांव में जंगल में लकड़ी लेने गई 60 वर्षीय सुखिया देवी पर बाघ ने हमला कर दिया। हमले में महिला की मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के तुरंत बाद प्रशासन ने पूरे क्षेत्र को अलर्ट मोड में रखा। चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन की अनुमति मिलने के बाद घटनास्थल के पास बाघ को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया गया। साथ ही बाघ को ट्रेंकुलाइज कर सुरक्षित रेस्क्यू करने की भी तैयारी की जा रही है।
कॉर्बेट प्रशासन ने क्षेत्र में हाथियों के माध्यम से गश्त बढ़ा दी है। जंगल में हाथियों की मदद से संवेदनशील इलाकों की निगरानी की जा रही है। इसके अलावा कैमरा ट्रैप भी लगाए गए हैं, ताकि बाघ की गतिविधियों पर 24/7 नजर रखी जा सके।
वन विभाग की टीम लगातार बाघ की मूवमेंट पर नजर रख रही है। ड्रोन की मदद से भी मॉनिटरिंग की जा रही है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बाघ को सुरक्षित तरीके से पकड़ा जाए और क्षेत्र में रहने वाले लोगों की सुरक्षा बनी रहे।
बाघ के हमले के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। ग्रामीण आक्रोशित हो गए और उन्होंने सड़क जाम कर वन विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि “हमें हमारी सुरक्षा चाहिए, बाघ को तुरंत पकड़ा जाए।”
उपनिदेशक राहुल मिश्रा ने बताया कि ग्रामीणों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सर्दियों के मौसम में वन्यजीव अक्सर आक्रामक हो जाते हैं और भोजन की तलाश में गांव की ओर रुख करते हैं।
पिंजरा और ट्रेंकुलाइज की तैयारी
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक राहुल मिश्रा ने कहा, “चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन की अनुमति मिलने के बाद बाघ को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया गया है। ट्रेंकुलाइजेशन की अनुमति भी मिल चुकी है। हाथियों और ड्रोन से गश्त बढ़ा दी गई है। हमारा लक्ष्य बाघ को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू करना है।” उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि सर्दियों में जंगल में लकड़ी लेने न जाएं, कूड़ा फैलाने से बचें, रात में लाइट जलाएं और पशुओं को खुला न छोड़ें।
विशेषज्ञ बताते हैं कि सर्दियों के मौसम में जंगल में भोजन की कमी के कारण वन्यजीव आक्रामक हो जाते हैं। वे आसानी से इंसानी बस्तियों के पास आने लगते हैं। ऐसे में प्रशासन और ग्रामीणों की सतर्कता दोनों जरूरी है।
वन विभाग पूरी तरह तैयार है कि बाघ को सुरक्षित तरीके से पकड़ कर क्षेत्र में शांति बहाल की जा सके। ट्रेंकुलाइजेशन और पिंजरा लगाने की प्रक्रिया पूरी तरह नियंत्रित तरीके से की जा रही है। वन्यजीव विभाग की टीम लगातार बाघ की गतिविधियों की मॉनिटरिंग कर रही है। साथ ही हाथियों और कैमरा ट्रैप की मदद से क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
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1. जंगल में अकेले न जाएं।
2. लकड़ी और अन्य सामान लेने के लिए समूह में जाएं।
3. रात में घरों के बाहर लाइट जलाएं।
4. कूड़ा बाहर न फेंके और पशुओं को सुरक्षित रखें।
5. बाघ या अन्य वन्यजीवों के नजदीक न जाएं।