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देहरादून में मामूली विवाद ने हिंसा का रूप ले लिया। गानों को लेकर शुरू हुआ विवाद ने वारदात का रूप ले लिया। घटना के दौरान लोग तमाशबीन बने रहे। विवाद करीब दो महीने पहले शुरू हुआ था। पुलिस ने मामले में जांच तेज कर दी है।
देहरादून में सनसनीखेज वारदात (Img- Internet)
Dehradun: उत्तराखंड के देहरादून में एक मामूली विवाद ने भयावह रूप ले लिया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बिहार के गानों को लेकर शुरू हुई तनातनी ने आखिरकार एक छात्र की जान ले ली। यह विवाद करीब दो महीने पहले शुरू हुआ था, जब विश्वविद्यालय गेट के पास कार में गाना बजाने को लेकर दो गुटों के बीच तनाव पैदा हो गया था।
मृतक दिव्यांशु एक निजी विश्वविद्यालय में बीटेक सीएस द्वितीय वर्ष का छात्र था और प्रेम नगर क्षेत्र में अपने दोस्तों के साथ हॉस्टल में रहता था। बताया जा रहा है कि विरोधी गुट लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर रख रहा था और मौका तलाश रहा था।
सोमवार रात जब दिव्यांशु प्रेम नगर बाजार में खाना खाने गया, तभी आरोपी वहां पहुंच गए। चश्मदीदों के मुताबिक आरोपियों ने पहले उसे धमकाया और फिर विरोध करने पर लाठी-डंडों और फावड़े से हमला कर दिया। इस हमले में दिव्यांशु गंभीर रूप से घायल हो गया।
सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि करीब 15 आरोपी भरे बाजार में युवक को पीटते रहे, लेकिन कोई भी उसे बचाने आगे नहीं आया। लोग सिर्फ तमाशा देखते रहे। बाद में एक दंपत्ति ने मानवता दिखाते हुए उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
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जानकारी के अनुसार, करीब 15 दिन पहले भी आरोपियों ने दिव्यांशु के एक साथी छात्र के साथ मारपीट की थी। इसके अलावा बाइक छीनने और हॉस्टल तक पहुंचकर धमकाने जैसी घटनाएं भी सामने आई थीं। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पुलिस से शिकायत के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं हुई।
दिव्यांशु अपने माता-पिता और छोटे भाई को छोड़ गया है। परिवार की उम्मीदें उसी पर टिकी थीं। छोटे भाई ने हाल ही में 12वीं की परीक्षा दी थी। बेटे की मौत से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में शोक का माहौल है।
घटना के बाद देहरादून पुलिस ने जांच तेज कर दी है। एसएसपी प्रमेन्द्र डोबाल ने बताया कि गुटबाजी करने वाले छात्रों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
घटना के बाद पुलिस ने प्रेम नगर क्षेत्र में सत्यापन अभियान चलाया। बिना सत्यापन छात्रों को रखने वाले हॉस्टल संचालकों पर 80 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। साथ ही कई वाहनों का चालान और दर्जनों लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
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सूत्रों के अनुसार आरोपी गुट खुद को “बिहार डिफॉल्टर” नाम से पहचान देता था और विश्वविद्यालय में दबंगई करता था। उनके साथ बाहरी लोग भी जुड़े हुए थे, जो अक्सर कमजोर छात्रों को निशाना बनाते थे।