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गोरखपुर की रहने वाली इशिता शर्मा ने अपने चौथे प्रयास में देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा IAS का एग्जाम न सिर्फ क्लियर किया है बल्कि ऑल इंडिया में 26 वां स्थान हासिल किया है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई।
गोरखपुर की इशिता शर्मा ने लहराया परचम
Gorakhpur: पूर्वांचल की धरती ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। गोरखपुर के राप्तीनगर की रहने वाली इशिता शर्मा ने देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा Union Public Service Commission (UPSC) में 26वीं रैंक हासिल कर आईएएस बनने का गौरव प्राप्त किया है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार, क्षेत्र और पूरे जनपद में खुशी और गर्व का माहौल है।
इशिता शर्मा ने चौथे प्रयास में यह मुकाम हासिल किया। इससे पहले तीसरे प्रयास में वह साक्षात्कार तक पहुंच चुकी थीं, लेकिन अंतिम सूची में जगह नहीं बना सकीं। असफलता से निराश होने के बजाय उन्होंने अपनी तैयारी को और मजबूत किया और चौथे प्रयास में शानदार सफलता हासिल कर अपने सपनों को साकार कर लिया।
इशिता ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गोरखपुर में प्राप्त की और आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली का रुख किया। उन्होंने University of Delhi से बीकॉम और एमकॉम की पढ़ाई पूरी की। सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने कॉमर्स विषय को ही वैकल्पिक विषय के रूप में चुना। खास बात यह रही कि उन्होंने अधिकतर तैयारी घर पर रहकर ही की और आत्म-अनुशासन तथा निरंतर अध्ययन के बल पर यह सफलता हासिल की।
इशिता की सफलता के पीछे उनके परिवार का बड़ा योगदान रहा। उनके पिता डी.के. शर्मा बैंक मैनेजर हैं, जबकि माता अर्चना शर्मा गृहिणी हैं। इशिता ने अपनी सफलता का श्रेय विशेष रूप से अपने बड़े भाई को दिया, जिनके मार्गदर्शन और प्रेरणा ने उन्हें कठिन समय में आगे बढ़ने की ताकत दी।
उन्होंने बताया कि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के दौरान कई बार चुनौतियां आती हैं, लेकिन धैर्य और निरंतर प्रयास ही सफलता की कुंजी है। इशिता के अनुसार, परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को अपने वैकल्पिक विषय का चयन सोच-समझकर करना चाहिए और नियमित अध्ययन की आदत बनाए रखनी चाहिए।
अपनी सफलता के बाद इशिता शर्मा ने कहा कि आईएएस बनने के बाद वह देश और समाज के लिए बेहतर काम करना चाहती हैं। खासतौर पर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में वह कार्य करने का संकल्प रखती हैं, ताकि समाज के हर वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
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गोरखपुर की इस बेटी की उपलब्धि ने न केवल जिले का नाम रोशन किया है, बल्कि हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा का नया स्रोत भी बन गई है। उनकी सफलता यह साबित करती है कि मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन के दम पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।