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पंचायत चुनाव
Lucknow: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन महीने के भीतर चुनाव कराने के निर्देश ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग के सामने समयबद्ध तैयारी की चुनौती खड़ी कर दी है। खास बात यह है कि पंचायत चुनाव के बाद 2027 विधानसभा चुनाव की सियासी सरगर्मी भी तेज होने वाली है। ऐसे में गांवों का जनादेश राजनीतिक दलों के लिए अहम संकेत दे सकता है।
तीन महीने में चुनाव, अब आरक्षण पर नजर
14 अक्टूबर 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव की प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी कराने का निर्देश दिया। अदालत ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग की रिपोर्ट में देरी को चुनाव टालने का पर्याप्त आधार नहीं माना। आयोग को रिपोर्ट पेश करने के लिए एक महीने की समयसीमा दी गई है।
पंचायत चुनाव में देरी की प्रमुख वजह ओबीसी आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया और कानूनी विवाद रहे हैं। अब आरक्षण निर्धारण, मतदाता सूची और चुनाव कार्यक्रम को समय पर पूरा करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।
2021 के नतीजे क्या बताते हैं?
पिछले पंचायत चुनावों में जिला पंचायत अध्यक्ष पदों पर भाजपा ने 75 में से 67 सीटें हासिल की थीं, जबकि समाजवादी पार्टी को पांच सीटें मिली थीं। हालांकि, जिला पंचायत अध्यक्षों के ये आंकड़े ग्राम प्रधानों या जिला पंचायत सदस्य पदों के पूरे चुनावी प्रदर्शन का प्रतिनिधित्व नहीं करते। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय उम्मीदवारों, जातीय समीकरणों और क्षेत्रीय मुद्दों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
Location : Lucknow
Published : 19 October 2026, 2:19 PM IST