पुराने सिक्के से पैसा दोगुना करने का लालच, फिर रची ऐसी साजिश कि खुल गया पूरा खेल!

वाराणसी में पुराने सिक्कों के नाम पर लाखों रुपये की ठगी और वन्यजीव तस्करी के नाम पर लोगों को फंसाने वाले गिरोह का STF और वन विभाग ने पर्दाफाश किया है। तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर मॉनिटर लिजर्ड के अंग, टाइगर के नाखून, नकदी और फर्जी पहचान पत्र बरामद किए गए हैं।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 2 August 2026, 3:21 PM IST
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Varanasi: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ठगी और वन्यजीव तस्करी के नाम पर लोगों को फंसाने वाले एक गिरोह का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। एसटीएफ और वन विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से प्रतिबंधित वन्यजीवों के अंग, नकदी, फर्जी पहचान पत्र और मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। जांच में सामने आया है कि गिरोह पहले पुराने सिक्कों के नाम पर लोगों को मोटा मुनाफा कमाने का लालच देता था और फिर उन्हें वन्यजीव तस्करी के केस में फंसाने की साजिश रचता था।

होम स्टे से वन्यजीवों के अंग बरामद

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रभात चतुर्वेदी निवासी सहडोल, मध्य प्रदेश, गिरधारी मौर्या निवासी कैंपियरगंज, गोरखपुर और संजीव कुमार सिंह निवासी मुंडेरवा, बस्ती के रूप में हुई है। तीनों को सारनाथ थाना क्षेत्र के फरीदपुर स्थित स्वास्तिक होम स्टे से पकड़ा गया।

आरोपियों के पास से मॉनिटर लिजर्ड के 14 अंग, टाइगर के दो नाखून, 1.58 लाख रुपये नकद, वन अधिकारी के दो फर्जी पहचान पत्र और चार मोबाइल फोन बरामद किए गए।

WCCB की सूचना पर शुरू हुई जांच

एसटीएफ के मुताबिक, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) से सूचना मिली थी कि प्रभात चतुर्वेदी वाराणसी में मॉनिटर लिजर्ड के अंग और टाइगर के नाखूनों की अवैध खरीद-फरोख्त की सूचना दे रहा है। वह कथित तस्करों को पकड़वाने का भी दावा कर रहा था।

सूचना के बाद निरीक्षक अनिल कुमार सिंह के नेतृत्व में एसटीएफ ने वन विभाग की टीम के साथ जांच शुरू की। टीम को फरीदपुर अंडरपास के पास प्रभात मिला। उसकी सूचना पर होम स्टे के कमरे की तलाशी ली गई, जहां से वन्यजीवों के अंग बरामद हुए।

पूछताछ में खुली ठगी की पूरी कहानी

मामला संदिग्ध लगने पर टीम ने आरोपियों से पूछताछ की। इसके बाद एक ऐसे षड्यंत्र का खुलासा हुआ, जिसमें पुराने सिक्कों के नाम पर लोगों से लाखों रुपये ऐंठने की योजना बनाई जाती थी।

गिरोह कथित तौर पर नकली पुराने सिक्के तैयार करता था। इसके बाद ऐसे लोगों की तलाश की जाती थी, जिन्हें यह विश्वास दिलाया जा सके कि पुराने सिक्के खरीदने के बाद उनका पैसा जल्द ही दोगुना हो जाएगा।

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पांच लाख लेकर पहुंचा था पीड़ित

चोलापुर क्षेत्र के मोहनदासपुर निवासी नीरज कुमार मौर्या भी इसी जाल में फंस गया। आरोप है कि नीरज अपने परिचित अभिषेक दूबे से पांच लाख रुपये लेकर गिरोह के सदस्यों के पास पहुंचा था।

आरोप के मुताबिक, दीनानाथ यादव और दीपक रुपये लेकर मौके से भाग निकले। इसके बाद गिरोह ने कथित तौर पर पहले से बनाई गई योजना के तहत एसटीएफ और वन विभाग को सूचना देकर छापा डलवा दिया, ताकि नीरज को ही वन्यजीव तस्करी के मामले में फंसा दिया जाए।

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STF ने ऐसे किया साजिश का खुलासा

टीम को पूरे मामले में कुछ गड़बड़ी नजर आई। पूछताछ और जांच आगे बढ़ी तो पुराने सिक्कों के नाम पर ठगी और वन्यजीव तस्करी के नाम पर फंसाने की साजिश सामने आ गई।

एसटीएफ के मुताबिक, गिरोह में प्रभात, गिरधारी और संजीव के अलावा गाजीपुर निवासी दीनानाथ यादव तथा बिहार निवासी दीपक और संतोष भी शामिल हैं। प्रभात की निशानदेही पर उसके हिस्से के 1.58 लाख रुपये भी बरामद किए गए हैं।

अन्य आरोपियों की तलाश जारी

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को इसी तरह ठगी या फर्जी वन्यजीव तस्करी के मामलों में फंसाने की कोशिश की है।

Location :  Varanasi

Published :  2 August 2026, 3:15 PM IST

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