UP Electricity Rates: बिजली बिल पर बड़ा फैसला जल्द! क्या नहीं बढ़ेंगी दरें या छंटनी से गहराएगा बिजली संकट?

उत्तर प्रदेश में नई बिजली दरों का ऐलान जल्द हो सकता है। उपभोक्ता परिषद ने दरें नहीं बढ़ाने और 10 फीसदी छूट जारी रखने की मांग की है। वहीं बिजली कर्मचारी संगठन ने कर्मचारियों की कमी और संविदा कर्मियों की छंटनी पर चिंता जताते हुए भर्ती और बेहतर आपूर्ति की मांग उठाई है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 27 June 2026, 11:03 AM IST
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Lucknow: उत्तर प्रदेश में वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरों की घोषणा जल्द होने की संभावना है। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने दर निर्धारण की प्रक्रिया पूरी कर ली है और अब किसी भी समय नई टैरिफ व्यवस्था का ऐलान किया जा सकता है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार भी बिजली दरों में बढ़ोतरी नहीं होगी।

उपभोक्ता परिषद ने की 10 फीसदी छूट जारी रखने की मांग

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बिजली दरें न बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि नोएडा पॉवर कंपनी के उपभोक्ताओं को मिलने वाली 10 फीसदी छूट को जारी रखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का बड़ा सरप्लस बकाया है, इसलिए दरें बढ़ाने के बजाय राहत दी जानी चाहिए।

16 हजार करोड़ रुपये के राजस्व अंतर का मुद्दा

बिजली वितरण कंपनियों ने वर्ष 2024-25 के ट्रूअप और वर्ष 2026-27 की जरूरतों को देखते हुए लगभग 16,448 करोड़ रुपये के राजस्व अंतर का हवाला दिया है। इसी आधार पर बिजली दरों में वृद्धि की मांग की गई थी, जिसे उपभोक्ता परिषद ने जनसुनवाई के दौरान खारिज कर दिया।

बिजली कंपनियों पर 51 हजार करोड़ सरप्लस का दावा

उपभोक्ता परिषद का दावा है कि प्रदेश की बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का करीब 51 हजार करोड़ रुपये सरप्लस है। परिषद का कहना है कि इस राशि के आधार पर बिजली दरों में कमी की जानी चाहिए। परिषद का दावा है कि उत्तर प्रदेश लगातार छठे साल बिजली दरें नहीं बढ़ाने वाला राज्य बन सकता है।

बिजली कर्मचारियों की कमी से बढ़ी चिंता

दूसरी तरफ विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने बिजली कर्मचारियों की कमी को लेकर चिंता जताई है। समिति का कहना है कि बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन कर्मचारियों की संख्या कम होती जा रही है। समिति के अनुसार वर्ष 2000 में जहां लाखों उपभोक्ताओं के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारी थे, वहीं अब उपभोक्ताओं की संख्या कई गुना बढ़ने के बावजूद कर्मचारी कम हो गए हैं।

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संविदा कर्मियों की छंटनी पर विरोध

कर्मचारी संगठन ने आरोप लगाया कि निजीकरण के नाम पर बड़ी संख्या में संविदा कर्मियों को हटाया गया है। संगठन ने मुख्यमंत्री से हटाए गए कर्मचारियों की बहाली और खाली पदों पर नियमित भर्ती की मांग की है।

बेहतर बिजली आपूर्ति की मांग

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सीमित स्टाफ के कारण बिजली आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि बढ़ती मांग के बीच पर्याप्त कर्मचारियों की नियुक्ति जरूरी है। अब सभी की नजर नियामक आयोग के फैसले और नई बिजली दरों की घोषणा पर है।

Location :  Lucknow

Published :  27 June 2026, 11:03 AM IST

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