UP के बिजली उपभोक्ताओं पर बढ़ा बोझ, जून के बिल में जोड़ा गया 10% फ्यूल सरचार्ज; जानें कितना पड़ेगा असर

उत्तर प्रदेश में जून के बिजली बिलों में 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज जोड़ दिया गया है। नियामक आयोग की आपत्ति के बावजूद लागू किए गए इस फैसले से 3.73 करोड़ उपभोक्ताओं पर करीब 1610 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 5 June 2026, 8:56 AM IST

Lucknow: उत्तर प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं को इस महीने अतिरिक्त आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ सकता है। विद्युत नियामक आयोग की नोटिस के बावजूद पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने जून में जारी किए जा रहे बिजली बिलों में 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार शुल्क (फ्यूल सरचार्ज) जोड़ दिया है। इसके चलते उपभोक्ताओं को सामान्य बिजली बिल के साथ अतिरिक्त शुल्क भी चुकाना होगा।

3.73 करोड़ उपभोक्ताओं पर पड़ेगा असर

पावर कॉरपोरेशन की ओर से जारी आदेशों के अनुसार बिलिंग सिस्टम में 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज जोड़ते हुए मई माह की खपत के बिल जारी किए जाने लगे हैं। अनुमान है कि इस फैसले से प्रदेश के करीब 3.73 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं पर लगभग 1610 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा। इससे घरेलू, वाणिज्यिक और अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।

उपभोक्ता परिषद ने जताई आपत्ति

इस मामले को लेकर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। परिषद ने आरोप लगाया है कि पावर कॉरपोरेशन ने विद्युत नियामक आयोग के निर्देशों और लागू विनियमों की अनदेखी करते हुए फ्यूल सरचार्ज वसूलने का निर्णय लिया है। परिषद ने इस कार्रवाई को नियमों के विरुद्ध बताते हुए आयोग में विधिक और मानहानि संबंधी प्रस्ताव दाखिल किया है।

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प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग

परिषद अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा कि आयोग पहले ही जून के बिजली बिलों के साथ 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज वसूलने के आदेश को नियमों के विपरीत मानते हुए पावर कॉरपोरेशन से जवाब तलब कर चुका है। इसके बावजूद शुल्क वसूली जारी रखना गंभीर मामला है। परिषद ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन के खिलाफ विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 142 और 146 के तहत कार्रवाई की मांग की है।

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आयोग के आदेशों की अनदेखी पर सवाल

उपभोक्ता परिषद का कहना है कि आयोग ने इस कदम को मल्टी ईयर टैरिफ रेगुलेशन-2025 का उल्लंघन माना है। परिषद के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों में स्पष्ट किया गया है कि रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत नियामक आयोग के आदेश सर्वोपरि होते हैं और उनका पालन सभी संबंधित संस्थाओं के लिए अनिवार्य है। अब इस मामले में आयोग के अगले कदम पर लाखों उपभोक्ताओं की नजर बनी हुई है।

Location :  Lucknow

Published :  5 June 2026, 8:56 AM IST