गोरखपुर से प्रयागराज तक हड़कंप! आयुष्मान योजना में गड़बड़ी पर 200 निजी अस्पतालों पर बड़ा एक्शन

उत्तर प्रदेश में आयुष्मान योजना से जुड़े निजी अस्पतालों पर हुई बड़ी कार्रवाई ने स्वास्थ्य क्षेत्र में हलचल बढ़ा दी है। गोरखपुर, प्रयागराज समेत कई जिलों के अस्पताल सरकार की जांच के दायरे में आए हैं। आखिर किन कमियों पर सरकार सख्त हुई और क्यों अचानक बढ़ी अस्पतालों की मुश्किलें?

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 16 May 2026, 11:33 AM IST
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Lucknow: उत्तर प्रदेश में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत निजी अस्पतालों पर योगी सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। गोरखपुर, प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी, मेरठ, आगरा, कानपुर और नोएडा समेत कई जिलों के करीब 200 निजी अस्पताल सरकार की जांच के दायरे में आए हैं। इनमें लगभग 100 अस्पतालों का भुगतान रोक दिया गया है, जबकि करीब 100 अस्पतालों का पंजीकरण निलंबित कर दिया गया है।

सरकार की इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। माना जा रहा है कि आयुष्मान योजना में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए यह अब तक की बड़ी कार्रवाई में से एक है।

गोरखपुर और प्रयागराज समेत कई जिलों में बड़ा असर

सरकारी कार्रवाई का सबसे ज्यादा असर उन जिलों में देखने को मिला जहां बड़ी संख्या में निजी अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत सूचीबद्ध हैं। गोरखपुर और प्रयागराज के कई अस्पतालों में दस्तावेजों और गुणवत्ता मानकों की जांच के बाद कार्रवाई की गई। इसके अलावा आगरा, लखनऊ, मेरठ, गाजियाबाद, वाराणसी, मथुरा, सहारनपुर, बरेली और नोएडा जैसे जिलों के अस्पताल भी कार्रवाई की जद में आए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने कई अस्पतालों की फाइलों और तकनीकी रिकॉर्ड की समीक्षा की।

क्यों हुई इतनी बड़ी कार्रवाई?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (साचीज) ने अस्पतालों के सत्यापन और गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया तेज की थी। जांच में पाया गया कि कई निजी अस्पताल निर्धारित मानकों का पालन नहीं कर रहे थे। कुछ अस्पतालों ने जरूरी तकनीकी दस्तावेज पूरे नहीं किए थे, जबकि कई जगह इंफ्रास्ट्रक्चर और पंजीकरण से जुड़ी कमियां सामने आईं। इसके बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई शुरू कर दी।

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अब 35 मानक पूरे करना जरूरी

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी अर्चना वर्मा के अनुसार अब अस्पतालों को “HEM 2.0” पोर्टल पर 35 अनिवार्य मानकों को पूरा करना होगा। इनमें अस्पताल का वैध पंजीकरण, फायर सेफ्टी एनओसी, मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, डॉक्टरों की शैक्षणिक योग्यता, एचएफआर पंजीकरण और अन्य तकनीकी दस्तावेज शामिल हैं। सरकार ने अस्पतालों को समय-समय पर ईमेल, वर्चुअल मीटिंग और कॉल के जरिए सहायता भी दी थी ताकि वे समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी कर सकें।

95 प्रतिशत अस्पतालों ने पूरी की प्रक्रिया

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के 95 प्रतिशत से अधिक अस्पताल HEM 2.0 पोर्टल पर सफलतापूर्वक माइग्रेट हो चुके हैं। हालांकि कुछ अस्पतालों ने बार-बार मौका मिलने के बावजूद प्रक्रिया पूरी नहीं की। इसी वजह से सरकार ने भुगतान रोकने और पंजीकरण निलंबित करने जैसे कड़े कदम उठाए। अधिकारियों का कहना है कि नियमों का पालन नहीं करने वाले अस्पतालों को भविष्य में और सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

डिजिटल हेल्थ सिस्टम पर सरकार का जोर

योगी सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल निगरानी और तकनीक आधारित व्यवस्था को तेजी से लागू कर रही है। अस्पतालों को NABH गुणवत्ता प्रमाणन लेने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके साथ ही ABDM सक्षम HMIS प्रणाली लागू करने पर जोर दिया जा रहा है ताकि मरीजों के इलाज और रिकॉर्ड की निगरानी डिजिटल तरीके से हो सके। सरकार चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड सिस्टम भी लागू कर रही है।

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फर्जीवाड़े और लापरवाही पर सख्ती

स्वास्थ्य विभाग अब डॉक्टरों की डिग्री और अस्पतालों के रिकॉर्ड के गलत इस्तेमाल से जुड़े मामलों पर भी विशेष नजर रख रहा है। शिकायत मिलने पर तुरंत जांच और कार्रवाई की जा रही है। सरकार का कहना है कि आयुष्मान योजना गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त और बेहतर इलाज देने के लिए बनाई गई है। ऐसे में किसी भी तरह की लापरवाही, फर्जीवाड़ा या नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

Location :  Lucknow

Published :  16 May 2026, 11:33 AM IST

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