रायबरेली में बुधवार को नगर पालिका परिषद के प्रस्ताव के खिलाफ सैकड़ों व्यापारियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। सुपर मार्केट की जर्जर बिल्डिंग को गिराने के फैसले से नाराज व्यापारियों ने पैदल मार्च कर कलेक्ट्रेट पहुंचकर धरना दिया।
Raebareli: नगर पालिका परिषद रायबरेली के फैसले के विरोध में बुधवार को शहर के सैकड़ों व्यापारी सड़कों पर उतर आए। सुपर मार्केट परिसर से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे विशाल पैदल मार्च में तब्दील हो गया। व्यापारी नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला अधिकारी कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए।
इस दौरान “ईओ तेरी तानाशाही नहीं चलेगी”, “व्यापारी एकता जिंदाबाद” और “अधिशासी अधिकारी मुर्दाबाद” जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन व्यापारियों का आक्रोश साफ नजर आया। उनका कहना था कि नगर पालिका का यह फैसला सीधे तौर पर उनकी रोजी-रोटी पर हमला है।
व्यापारियों ने बताया कि सुपर मार्केट की वर्षों पुरानी इमारत को पीडब्ल्यूडी विभाग ने जर्जर घोषित किया है। इसके बाद नगर पालिका परिषद द्वारा पूरी बिल्डिंग को गिराकर नए स्वरूप में निर्माण कराने का प्रस्ताव लाया गया। इस प्रस्ताव से सुपर मार्केट में दशकों से कारोबार कर रहे सैकड़ों दुकानदारों के सामने बेरोजगारी का संकट खड़ा हो गया है।
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प्रदर्शन कर रहे व्यापारियों का कहना है कि अगर बिल्डिंग के कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त हैं तो उनकी मरम्मत कराई जा सकती है, लेकिन पूरी इमारत को गिराना नियमों और नीतियों के विरुद्ध है। उनका आरोप है कि नगर पालिका प्रशासन बिना किसी ठोस योजना और वैकल्पिक व्यवस्था के दुकानदारों को उजाड़ने की तैयारी कर रहा है।
धरने पर बैठे व्यापारियों ने स्पष्ट शब्दों में मांग की कि जब तक दुकानदारों के लिए सुरक्षित और स्थायी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक सुपर मार्केट की बिल्डिंग को गिराने का प्रस्ताव तत्काल प्रभाव से रोका जाए। व्यापारियों का कहना था कि उनका व्यापार ही उनके परिवारों की आजीविका का एकमात्र साधन है और अचानक दुकानें हटाए जाने से वे सड़क पर आ जाएंगे।
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इस आंदोलन में व्यापारी नेता पारुल बाजपेई, अतुल गुप्ता, पंकज मुरारका सहित बड़ी संख्या में व्यापारी मौजूद रहे। नेताओं ने प्रशासन से संवाद की अपील करते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक और तेज किया जाएगा। व्यापारियों ने कहा कि वे अपने हक और रोजगार की रक्षा के लिए किसी भी स्तर तक संघर्ष करने को तैयार हैं।