भाषण और ज्ञापन में सीमित रह गया प्रदूषण के खिलाफ कैंडल मार्च, आश्वासन पर स्थगित हुआ आंदोलन

गोरखपुर सहजनवां क्षेत्र गीडा में संचालित फैक्ट्रियों से फैल रहे प्रदूषण के खिलाफ रविवार को प्रस्तावित कैंडल मार्च आखिरकार भाषण और ज्ञापन तक ही सिमट कर रह गया। पूर्व विधायक देवनारायण सिंह के आह्वान पर आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर सहजनवां नगर पंचायत सहित आसपास के कई गांवों के ग्रामीणों में खासा उत्साह देखा जा रहा था।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 1 February 2026, 6:35 PM IST

Gorakhpur: गोरखपुर सहजनवां क्षेत्र गीडा में संचालित फैक्ट्रियों से फैल रहे प्रदूषण के खिलाफ रविवार को प्रस्तावित कैंडल मार्च आखिरकार भाषण और ज्ञापन तक ही सिमट कर रह गया। पूर्व विधायक देवनारायण सिंह के आह्वान पर आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर सहजनवां नगर पंचायत सहित आसपास के कई गांवों के ग्रामीणों में खासा उत्साह देखा जा रहा था। लंबे समय से वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण से जूझ रहे ग्रामीण इस आंदोलन से ठोस कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे थे।

प्रदूषण के दुष्प्रभावों पर अपनी बात रखी

निर्धारित समय पर बड़ी संख्या में ग्रामीण रेलवे स्टेशन परिसर में एकत्र हुए। भीड़ की संभावना को देखते हुए प्रशासन पहले से ही सतर्क दिखाई दिया और पूरे दिन पुलिस-प्रशासन की तैनाती बनी रही। जैसे-जैसे भीड़ बढ़ी, नेताओं ने मंच से संबोधन शुरू किया और प्रदूषण के दुष्प्रभावों पर अपनी बात रखी।

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इसी दौरान घोषणा की गई कि प्रशासन ने समस्या के समाधान के लिए एक माह का समय मांगा है, जिसके चलते फिलहाल कैंडल मार्च को स्थगित किया जा रहा है। नेताओं ने भरोसा दिलाया कि यदि तय समय सीमा के भीतर प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं हुआ तो आगे बड़ा आंदोलन किया जाएगा। हालांकि, यह घोषणा होते ही कार्यक्रम की मुख्य रूपरेखा बदल गई और कैंडल मार्च नहीं निकाला गया।

घोषणा के बाद ग्रामीण धीरे-धीरे तितर-बितर हो गए। कई ग्रामीणों के चेहरों पर निराशा साफ दिखाई दी, जबकि कुछ लोग इसे आंदोलन को कमजोर करने वाला कदम बता रहे थे। मौके पर पहुंचे उपजिलाधिकारी केशरी नंदन तिवारी ने भी लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदूषण की समस्या को गंभीरता से लिया जा रहा है और संबंधित फैक्ट्रियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने एक माह के भीतर ठोस पहल करने का आश्वासन दिया।

इसके पश्चात उपस्थित नेताओं द्वारा एसडीएम को प्रदूषण से मुक्ति दिलाने की मांगों को लेकर एक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में फैक्ट्रियों की जांच, प्रदूषण मानकों के अनुपालन और दोषी इकाइयों पर कार्रवाई की मांग की गई।

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कैंडल मार्च के स्थगित होने के बाद ग्रामीणों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। कोई इसे प्रशासनिक दबाव बता रहा था तो कोई नेताओं की रणनीति पर सवाल उठा रहा था। कुल मिलाकर, प्रदूषण के खिलाफ उठी आवाज उस दिन आंदोलन के बजाय आश्वासन पर आकर ठहर गई।

Location : 
  • Gorakhpur

Published : 
  • 1 February 2026, 6:35 PM IST