इमली का पेड़ बना मौत का सबब, एक घर में पसरा मातम, ऐसे हुआ हादसा

जनपद में बुधवार शाम को एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आयी है। इस घटना से एक परिवार में मातम पसर गया। एक जर्जर इमले के पेड़ की चपेट में आने से यह हादसा हुआ। सूचना पर पहुंची पुलिस इस हादसे की जांच में जुट गई है। इस घटना को लेकर स्थानीयों में आक्रोश व्याप्त है।

Post Published By: Jay Chauhan
Updated : 2 April 2026, 1:20 AM IST

Gorakhpur: शहर में बुधवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया, जब अचानक सड़क किनारे खड़ा एक पुराना इमली का पेड़ गिर पड़ा और उसकी चपेट में आकर एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि एक पत्रकार गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा जीएम ऑफिस रेलवे के सामने उस समय हुआ, जब दोनों एक ही वाहन से शास्त्री चौक स्थित गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब से अपने घर लौट रहे थे।

मृतक की पहचान

मृतक की पहचान जितेंद्र शुक्ला (पुत्र मार्कण्डेय), निवासी बिछिया (हनुमान मंदिर के पास) के रूप में हुई है। वहीं, घायल प्रमोद पाल (पुत्र कन्हैया पाल), जो पेशे से पत्रकार हैं, का इलाज जारी है। बताया जा रहा है कि वाहन जितेंद्र शुक्ला स्वयं चला रहे थे।

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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही गाड़ी जीएम ऑफिस रेलवे के सामने पहुंची, अचानक एक जर्जर इमली का पेड़ भरभराकर सड़क पर गिर पड़ा और सीधा वाहन पर आ गिरा। इस अप्रत्याशित हादसे में दोनों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। मौके पर अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए दोनों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया।

डॉक्टरों ने जितेंद्र शुक्ला की हालत अत्यंत गंभीर देखते हुए उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर किया। परिजन पहले उन्हें एक निजी अस्पताल (सावित्री हॉस्पिटल) ले गए, जहां डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद मेडिकल कॉलेज ले जाते समय रास्ते में ही जितेंद्र शुक्ला ने दम तोड़ दिया। इस खबर से परिवार में कोहराम मच गया।

घटना की सूचना मिलते ही गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब के अध्यक्ष ओंकार धर द्विवेदी, मंत्री पंकज श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में पत्रकार अस्पताल पहुंचे और घायल का हालचाल जाना।

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स्थानीयों ने लगाए ये आरोप

यह हादसा शाम करीब 4 बजे हुआ और इसके बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में कई पुराने और जर्जर पेड़ सड़क किनारे खड़े हैं, जिनकी समय रहते न तो छंटाई की जाती है और न ही हटाने की कोई ठोस व्यवस्था है।

यह घटना प्रशासन के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करती है—क्या ऐसे खतरनाक पेड़ों की पहचान और समय पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए? अगर समय रहते ध्यान दिया जाता, तो शायद एक जान बचाई जा सकती थी।

Location : 
  • Gorakhpur

Published : 
  • 2 April 2026, 1:20 AM IST