जब चाहा तब ट्रांसफर? सुल्तानपुर में बिजली विभाग पर मनमानी के आरोप, जानिये क्या है मामला

सुल्तानपुर में UPPCL के तहत फरीदपुर पावर हाउस के जेई का अचानक तबादला कर टीजी-2 को चार्ज दिए जाने से विवाद खड़ा हो गया है। ट्रांसफर नीति, सेवा नियमावली और पदक्रम की अनदेखी के आरोप लगे हैं, जांच की मांग तेज।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 17 February 2026, 12:19 PM IST

Sultanpur: उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के अधीन संचालित बिजली विभाग में हालिया तबादला सूची को लेकर विभागीय हलकों में हलचल तेज हो गई है। आरोप है कि फरीदपुर पावर हाउस में तैनात एक अवर अभियंता (JE) का अचानक कादीपुर स्थानांतरण कर दिया गया, जबकि उनकी जगह दरियापुर के प्रभारी राजाराम वर्मा (टीजी-2) को कार्यभार सौंप दिया गया। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया।

पदक्रम की अनदेखी का आरोप

विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय सेवा नियमावली और पदक्रम (Hierarchy) के विपरीत है। अवर अभियंता (JE) तकनीकी रूप से टीजी-2 से वरिष्ठ श्रेणी का पद होता है। ऐसे में कनिष्ठ श्रेणी के कर्मचारी को प्रभारी बनाना सामान्य प्रक्रिया के अनुरूप नहीं माना जाता।

एक अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि यदि इस आदेश को न्यायालय में चुनौती दी जाती है, तो संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जा सकता है। उनका दावा है कि पूर्व में उच्च स्तर से स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि JE के स्थान पर टीजी-2 को प्रभारी न बनाया जाए।

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सेवा नियमावली क्या कहती है?

UPPCL की सेवा नियमावली और कार्मिक विनियमों के अनुसार

  • तकनीकी पदों पर कार्यभार समान कैडर के अधिकारी को सौंपा जाना चाहिए।
  • पदक्रम का पालन अनिवार्य है।
  • आकस्मिक परिस्थितियों में वैकल्पिक व्यवस्था का स्पष्ट उल्लेख आदेश में होना चाहिए।
  • स्थानांतरण आदेश सक्षम प्राधिकारी द्वारा लिखित कारणों सहित जारी किया जाना चाहिए।

सूत्रों का आरोप है कि जारी आदेश में विशेष प्रशासनिक कारणों का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया।

UPPCL में मनमानी? (Img- Internet)

वार्षिक ट्रांसफर नीति पर सवाल

राज्य सरकार की वार्षिक स्थानांतरण नीति के अनुसार सामान्यतः तबादले मई–जून में किए जाते हैं। एक ही वित्तीय वर्ष में बार-बार तबादले से बचने और बिना स्पष्ट प्रशासनिक आवश्यकता के आकस्मिक स्थानांतरण न करने के निर्देश हैं।

बताया जा रहा है कि संबंधित जेई के खिलाफ कोई लिखित शिकायत या अनुशासनात्मक जांच लंबित नहीं थी। ऐसे में अचानक तबादला और कनिष्ठ कर्मचारी को चार्ज देने से कर्मचारियों के बीच असंतोष बढ़ा है।

आदेश पत्र में क्या है उल्लेख?

जारी आदेश में कहा गया है कि
1. आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
2. संबंधित अधिकारी तुरंत कार्यभार ग्रहण करेंगे।
3. किसी प्रकार का यात्रा भत्ता देय नहीं होगा।

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हालांकि प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी किए जाने का उल्लेख है, लेकिन नीति अनुपालन और वैधानिकता को लेकर सवाल बने हुए हैं।

जांच की मांग तेज

मामला सार्वजनिक होने के बाद विभागीय जांच की मांग उठने लगी है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि शासनादेश, सेवा नियमावली और पदक्रम की अनदेखी हुई है, तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

बड़ा सवाल: पारदर्शिता बनाम मनमानी

यह विवाद केवल एक तबादले का नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और निष्पक्ष कार्मिक प्रबंधन का मुद्दा बन गया है। यदि नियमों की अनदेखी सिद्ध होती है, तो इसका असर कर्मचारियों के मनोबल और विभाग की साख पर पड़ सकता है।

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उच्च स्तर से इस प्रकरण पर क्या निर्णय लिया जाता है और क्या औपचारिक जांच बैठाई जाती है।

Location : 
  • Sultanpur

Published : 
  • 17 February 2026, 12:19 PM IST