गोरखपुर में आवारा पशुओं की समस्या बढ़ती जा रही है। छुट्टा पशु किसानों की वेशकीमती फसलों को बरबाद कर रहे हैं। आवारा पशुओं के कारण किसान को कड़कड़ाती ठंड में खेतों रखवाली करनी पड़ रही है जिससे किसान बीमार पड़ रहे हैं।

गोरखपुर में आवारा पशुओं का आतंक
Gorakhpur: जनपद के नगर पंचायत गोला क्षेत्र में निराश्रित व छुट्टा पशुओं की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। मुख्य बाजार से लेकर नगर के विस्तारित ग्रामीण इलाकों तक इन पशुओं का आतंक किसानों की नींद और आजीविका दोनों छीन रहा है। हालात ऐसे हैं कि कड़ाके की ठंड और गलन भरे मौसम में भी किसान रात-रात भर खेतों में जागकर अपनी मेहनत की फसल की रखवाली करने को मजबूर हैं।
भीटी, रामामऊ भड़सड़ा, रानीपुर, मन्नीपुर और बांहपुर सहित कई गांवों के किसानों का कहना है कि दर्जनों की संख्या में छुट्टा पशु दिन के साथ-साथ रात में भी खेतों में घुसकर खड़ी फसलों को चर जा रहे हैं। गेहूं, सरसों और सब्जियों की फसल को भारी नुकसान हो रहा है। किसानों का आरोप है कि जब वे पशुओं को भगाने का प्रयास करते हैं तो कई बार पशु आक्रामक होकर हमला तक कर देते हैं, जिससे जान का खतरा बना रहता है।
लगातार रातजगा करने और ठंड में खुले खेतों में रहने के कारण कई किसान बीमार भी पड़ चुके हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से किसानों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। किसानों का कहना है कि शासन की मंशा स्पष्ट है कि निराश्रित और छुट्टा पशुओं को पकड़कर स्थायी या अस्थायी गौशालाओं में रखा जाए, ताकि किसानों की फसल सुरक्षित रह सके। लेकिन गोला नगर पंचायत में इस नीति का जमीनी स्तर पर कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है।
निराश्रित पशु न सिर्फ खेतों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि दिन के समय सड़कों पर झुंड बनाकर घूमने के कारण दुर्घटनाओं का कारण भी बन रहे हैं। कई बार वाहन चालकों को अचानक सामने आ जाने वाले पशुओं के कारण हादसों का सामना करना पड़ता है, जिससे आमजन की जान भी खतरे में पड़ रही है।
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किसानों का आरोप है कि नगर पंचायत और संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या पर आंख मूंदे बैठे हैं। न तो पशुओं को पकड़ने की नियमित व्यवस्था है और न ही गौशालाओं की समुचित निगरानी। किसानों ने शासन और जिला प्रशासन से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से विशेष अभियान चलाकर निराश्रित पशुओं को पकड़ा जाए, गौशालाओं की संख्या और क्षमता बढ़ाई जाए तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।