क्या है UGC का इतिहास? जानिये भारत की उच्च शिक्षा में इसकी भूमिका के बारे में

उत्तर भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था में यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) एक केंद्रीय नियामक संस्था है, जिसे हिंदी में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग कहा जाता है। क्या है UGC का इतिहास? जानिये पूरी रिपोर्ट

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 29 January 2026, 8:38 PM IST
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New Delhi: उत्तर भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था में यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) एक केंद्रीय नियामक संस्था है, जिसे हिंदी में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग कहा जाता है। यह भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के तहत काम करता है और देश में विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा को व्यवस्थित करने, उसका समन्वय करने और गुणवत्ता बनाए रखने की जिम्मेदारी रखता है।

यूजीसी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ाई, परीक्षा और शोध के मानक तय करता है, योग्य संस्थानों को अनुदान प्रदान करता है और केंद्र-राज्य सरकारों को उच्च शिक्षा के मुद्दों पर सलाह देता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्र जिस संस्थान से पढ़ाई कर रहे हैं, उसकी डिग्री भविष्य में मान्य रहे।

यूजीसी का इतिहास

यूजीसी का गठन आजादी से पहले ही शुरू हुआ था। 1944 में सार्जेंट रिपोर्ट में विश्वविद्यालय अनुदान समिति बनाने की सिफारिश की गई। 1945 में इसका प्रारंभिक गठन हुआ और 1947 में सभी विश्वविद्यालयों के मामलों की जिम्मेदारी दी गई। 28 दिसंबर 1953 को तत्कालीन शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद ने इसका औपचारिक उद्घाटन किया। बाद में, नवंबर 1956 में यूजीसी अधिनियम के तहत इसे कानूनी दर्जा मिला। इसके कार्यालय दिल्ली में स्थित हैं।

यूजीसी की प्रमुख जिम्मेदारियां

यूजीसी न केवल उच्च शिक्षा संस्थानों को नियंत्रित करता है, बल्कि छात्रों के हितों की सुरक्षा और उनके भविष्य को सुनिश्चित करने में भी अहम भूमिका निभाता है। इसके तहत उच्च शिक्षा को बढ़ावा देना और मानक तय करना, डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट की मान्यता सुनिश्चित करना, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को वित्तीय सहायता प्रदान करना, एंटी-रैगिंग नियम और समान अवसर नीति लागू करना तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप मल्टीडिसिप्लिनरी एजुकेशन और इंटर्नशिप को बढ़ावा देना जैसी जिम्मेदारियां शामिल हैं। इस प्रकार यूजीसी का प्रभाव छात्रों के शैक्षणिक अनुभव, उनके करियर और समग्र सुरक्षा में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

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यूजीसी के नए नियम 2026 (Equity Act 2026)

यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस 2026 लागू किए, जिन्हें आमतौर पर यूजीसी इक्विटी एक्ट 2026 कहा जा रहा है। इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान और दिव्यांगता के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव को रोकना है। नियमों के तहत प्रत्येक संस्थान में समान अवसर केंद्र (EOC) की स्थापना अनिवार्य होगी, साथ ही इक्विटी कमेटी का गठन भी किया जाएगा। शिकायतों के निवारण के लिए 24×7 हेल्पलाइन और ऑनलाइन पोर्टल की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, संस्थानों में Equity Ambassadors और Squads की नियुक्ति की जाएगी, जो समानता और समावेशन सुनिश्चित करने में निगरानी और जागरूकता का काम करेंगे। नए नियमों में भेदभाव की परिभाषा को अधिक व्यापक बनाया गया है और अगर कोई संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करता है तो उसके अनुदान को रोकने या मान्यता निलंबित करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।

ग्राफ आइडिया: कॉलम चार्ट — 2026 नियम vs 2012 नियम में अंतर दिखाएं:

  • दायरा (जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान, दिव्यांगता)

  • शिकायत निवारण तंत्र (24×7 हेल्पलाइन + ऑनलाइन पोर्टल)

  • इक्विटी कमेटी (अनिवार्य बनाम सिफारिश)

  • दंड प्रावधान (अनुदान रोकना / मान्यता निलंबित)

नए नियमों का विवाद

नए यूजीसी नियम 2026 के लागू होने के बाद देश के कई राज्यों में इसका विरोध तेज हो गया है। विरोधियों का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने के लिए ठोस सबूत की अनिवार्यता नहीं है, और आरोपित को स्वयं को निर्दोष साबित करना पड़ता है। साथ ही, नियम केवल छात्रों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शिक्षक और स्टाफ भी इसके दायरे में आते हैं, और जनरल कैटेगरी के लोगों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं दिए गए हैं। इस विवाद के चलते मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया, जिसने 28 फरवरी को नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी और कहा कि तब तक 2012 के नियम ही लागू रहेंगे। इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को निर्धारित की गई है।

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शिक्षा मंत्रालय का रुख

यूजीसी और शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि नए नियम NEP-2020 और न्यायिक निर्देशों के अनुरूप हैं। इसका उद्देश्य किसी वर्ग को निशाना बनाना नहीं, बल्कि सभी छात्रों को समान अवसर और गरिमा सुनिश्चित करना है। विस्तृत स्पष्टीकरण जल्द जारी किया जाएगा, ताकि नियम का गलत इस्तेमाल न हो।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 29 January 2026, 8:38 PM IST

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