सोनभद्र में 26 जनवरी को सीओ की सरकारी गाड़ी से महिला की मौत के मामले में पीड़ित परिवार को अब तक न्याय नहीं मिला है। सरदार सेना ने 1 करोड़ मुआवजा, सरकारी नौकरी और दोषी अधिकारी पर कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन तेज कर दिया है।

सरदार सेना ने खोला मोर्चा (फोटो सोर्स- डाइनामाइट न्यूज़)
Sonbhadra: उत्तर प्रदेश के जनपद सोनभद्र में 26 जनवरी को हुई एक सड़क दुर्घटना अब प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर रही है। पिपरी क्षेत्र में एक प्रशासनिक वाहन की टक्कर से एक महिला की मौत हो गई, लेकिन डेढ़ महीने बाद भी पीड़ित परिवार न्याय के लिए भटक रहा है। मृतका की पहचान अस्पताली देवी के रूप में हुई है, जो अपने छोटे से मिठाई के प्रतिष्ठान से परिवार का पालन-पोषण करती थीं।
मृतका के पति कमलेश सिंह, निवासी ग्राम दुरावल खुर्द, ने पुलिस और वाहन चालक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि घटना के समय उनकी पत्नी सड़क किनारे खड़ी थीं, तभी पिपरी के सीओ का सरकारी वाहन (संख्या UP-32-AG-8177) तेज रफ्तार और लापरवाही से चलाते हुए उन्हें टक्कर मार गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि मौके पर ही उनकी पत्नी की मौत हो गई।
कमलेश सिंह का आरोप है कि हादसे के तुरंत बाद प्रशासनिक दबाव में सरकारी वाहन को मौके से हटा दिया गया और मामले को अज्ञात ट्रक से हुई दुर्घटना के रूप में दर्ज करने की कोशिश की गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने भी दावा किया है कि दुर्घटना सरकारी वाहन से ही हुई थी। पीड़ित का कहना है कि पुलिस ने गलत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर साक्ष्यों से छेड़छाड़ की, जिससे मामला कमजोर हो जाए।
प्रशासन पर साजिश का आरोप (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
यह मामला स्थानीय समाचार पत्रों में फोटो सहित प्रकाशित हुआ, इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें न तो मुआवजा मिला और न ही किसी सरकारी योजना का लाभ, जिससे उनका जीवन और भी कठिन हो गया है।
मामले की जानकारी मिलते ही सरदार सेना और जनहित संकल्प पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आर. एस. पटेल मंगलवार को सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए पीड़ित परिवार के लिए न्याय की मांग की।
सरदार सेना ने प्रशासन के सामने चार प्रमुख मांगें रखीं- पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा, एक सरकारी नौकरी, 5 बीघा जमीन और दुर्घटना में लिप्त प्रशासनिक अधिकारी पर जांच कर तत्काल कार्रवाई। इसके साथ ही सरकारी वाहन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की भी मांग की गई। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि 48 घंटे के भीतर न्यायोचित कार्रवाई नहीं हुई, तो गांधीवादी तरीके से आंदोलन किया जाएगा।
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मांगों पर कोई कार्रवाई न होने से आक्रोशित समाज के हजारों लोग और पीड़ित परिवार के सदस्य जिलाधिकारी परिसर में एकत्रित हो गए। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, उनका आंदोलन जारी रहेगा। सरदार सेना ने 'न्याय महापंचायत' आयोजित करने की भी चेतावनी दी है, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन की होगी।