सोनभद्र के लोढ़ी टोल प्लाजा पर महिला अधिवक्ता आरती पाण्डेय और साथियों से मारपीट के बाद अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन किया। पुलिस ने टोल तक पहुंचने से रोका। आरोपी टोल कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारी जारी है।

अधिवक्ताओं का आंदोलन
Sonbhadra: रॉबर्ट्सगंज के लोढ़ी टोल प्लाजा पर रविवार 1 फरवरी की शाम हुई महिला अधिवक्ता आरती पाण्डेय और उनके साथियों से मारपीट की घटना के बाद विवाद बढ़ गया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अधिवक्ताओं ने जमकर प्रदर्शन किया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।
सूत्रों के अनुसार, घटना के विरोध में अधिवक्ता कचहरी से एकजुट होकर टोल प्लाजा की ओर निकल गए। हालांकि पुलिस ने भारी सुरक्षा के साथ उन्हें टोल प्लाजा तक पहुंचने से रोक दिया। काफी मनमाने प्रयासों और मनोबल के बावजूद अधिवक्ताओं का एक हिस्सा टोल प्लाजा तक नहीं जा सका और वे कचहरी वापस लौट गए। इस दौरान पीड़ित अधिवक्ता आरती पाण्डेय ने जोर देकर कहा कि उन्हें न्याय मिलना चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।
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अधिवक्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने लोढ़ी टोल प्लाजा हटाने और 40 किलोमीटर के भीतर टोल नियम के विरोध की मांग भी की। इसके अलावा उन्होंने टोल की मियाद की उच्च स्तरीय जांच कराने की अपील की। पुलिस ने मौके पर भारी फोर्स तैनात कर किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सतर्कता बढ़ा दी।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू की। रॉबर्ट्सगंज पुलिस ने अब तक 2 नामजद अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। अन्य टोल कर्मियों की तलाश जारी है। घोरावल और सीओ सिटी रणधीर मिश्रा ने बताया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस पूरी तरह सतर्क है और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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घटना के विरोध में जिला मुख्यालय पर अधिवक्ताओं ने कार्य बहिष्कार कर नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि केवल माफी पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह घटना न केवल व्यक्तिगत स्तर पर गंभीर है, बल्कि पेशेवर गरिमा और महिला सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी चिंता का विषय है।