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बिजली विभाग में करोड़ों रुपये के गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। उप मुख्य लेखाधिकारी कार्यालय, गोरखपुर में तैनात सहायक लेखाकार ईशपाल सिंह को सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
कार्यालय मुख्य अभियंता
Gorakhpur: गोरखपुर में बिजली विभाग में करोड़ों रुपये के गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। उप मुख्य लेखाधिकारी कार्यालय, गोरखपुर में तैनात सहायक लेखाकार ईशपाल सिंह को सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। उन पर बागपत में तैनाती के दौरान उपभोक्ताओं से बिजली बिल के नाम पर वसूली गई भारी धनराशि को निगम खाते में जमा न करने का गंभीर आरोप सिद्ध हुआ है। विभागीय जांच के बाद न सिर्फ उन्हें सेवा से हटाया गया, बल्कि 11 लाख छह हजार 457 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
मामले की जांच गोरखपुर जोन प्रथम के मुख्य अभियंता आशुतोष श्रीवास्तव द्वारा की गई। जांच में सामने आया कि ईशपाल सिंह ने अपनी तैनाती के दौरान सरकारी पद का दुरुपयोग करते हुए बिजली निगम को भारी वित्तीय क्षति पहुंचाई। रिपोर्ट में आरोपों को प्रमाणित पाए जाने के बाद विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए यह बड़ी कार्रवाई की।
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जानकारी के अनुसार, ईशपाल सिंह की तैनाती विद्युत वितरण खंड बागपत में 27 फरवरी 2016 से 29 मई 2018 तक रही। इस अवधि में उन्होंने तत्कालीन तकनीशियन ग्रेड-2 (टीजी-2) सुरेश बाबू के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से गबन को अंजाम दिया। आरोप है कि 25 रसीद बुकों के माध्यम से उपभोक्ताओं से बिजली बिल के रूप में कुल 1 करोड़ 69 लाख 52 हजार 473 रुपये की वसूली की गई, लेकिन यह पूरी धनराशि बिजली निगम के खाते में जमा नहीं कराई गई।
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि यह राशि सीधे उपभोक्ताओं से ली गई थी, जिससे न सिर्फ निगम को आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि उपभोक्ताओं के साथ भी धोखाधड़ी की गई। विभागीय स्तर पर इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता और कदाचार माना गया।
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सेवानिवृत्ति से ठीक पहले हुई इस कार्रवाई ने विभाग में हड़कंप मचा दिया है। अधिकारियों का कहना है कि यह संदेश स्पष्ट है कि सेवा के अंतिम दिन तक भी भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई तय है, चाहे कर्मचारी कितने ही वरिष्ठ पद पर क्यों न हो।
इस मामले को लेकर बिजली विभाग में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, गबन की पूरी राशि की वसूली और अन्य कानूनी पहलुओं पर भी आगे की कार्रवाई की जा सकती है। यह प्रकरण बिजली विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।