राम मंदिर चढ़ावे की जांच में बड़ा मोड़, आखिर किसके हाथ में होगी जांच की कमान?

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को एसआईटी के पुनर्गठन पर निर्देश लेने को कहा है। कोर्ट ने अनुभवी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की निगरानी में निष्पक्ष जांच पर जोर दिया और मामले के राजनीतिकरण से बचने की सलाह दी। अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 20 July 2026, 6:41 PM IST
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New Delhi: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अहम टिप्पणी की। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से विशेष जांच टीम (SIT) के पुनर्गठन पर आवश्यक निर्देश लेने को कहा और स्पष्ट किया कि जांच किसी अनुभवी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की निगरानी में होनी चाहिए। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि पूरे मामले का किसी भी प्रकार से राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए।

एसआईटी की संरचना पर कोर्ट ने उठाए सवाल

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि मामले की जांच जारी है और अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि उन्होंने जांच के हित में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने से इनकार किया।

जब अदालत ने पूछा कि क्या वर्तमान में एसआईटी जांच कर रही है, तो सरकार की ओर से बताया गया कि फिलहाल राज्य पुलिस जांच कर रही है। इस पर कोर्ट ने कहा कि सरकार एसआईटी के पुनर्गठन पर विचार करे और किसी अनुभवी अधिकारी को इसकी कमान सौंपे।

दान के रिकॉर्ड को लेकर भी हुई अहम चर्चा

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में कहा गया कि मंदिर निर्माण के दौरान देशभर से मिले दान का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि दानदाताओं को पारदर्शिता का भरोसा मिल सके। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी रिकॉर्ड वेबसाइट पर डालना आवश्यक नहीं है, लेकिन प्रत्येक दान और उसकी रसीद का सुरक्षित एवं व्यवस्थित रिकॉर्ड रखा जाना चाहिए।

सबूत सुरक्षित रखने के निर्देश

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग भी उठी। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने भरोसा दिलाया कि जांच से जुड़े सभी सबूत सुरक्षित रखे जा रहे हैं। अदालत ने संकेत दिए कि यदि आवश्यक हुआ तो आगे और निर्देश जारी किए जाएंगे।

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राजनीतिकरण से बचने की नसीहत

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्यायालय राजनीति का मंच नहीं है। यह केवल कथित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना चाहता है। अदालत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और जांच को राजनीतिक रंग न देने की सलाह दी।

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27 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम आदेश पारित नहीं किया है। उत्तर प्रदेश सरकार को एसआईटी के पुनर्गठन और जांच की रूपरेखा पर निर्देश लेकर अगली सुनवाई में अदालत को जानकारी देने के लिए कहा गया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।

Location :  Ayodhya

Published :  20 July 2026, 6:41 PM IST

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