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Raebareli: हरचंदपुर थाना क्षेत्र के ओई गांव में बारिश के बाद जमीन धंसने से सामने आई रहस्यमयी सुरंग अब इतिहास के कई राज खोलने की ओर बढ़ रही है। एक सप्ताह पहले हुई इस घटना के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की जांच में ऐसे संकेत मिले हैं, जिससे माना जा रहा है कि यह स्थल ऐतिहासिक महत्व का हो सकता है। शुरुआती जांच में मिले अवशेषों को विशेषज्ञ कुषाणकालीन मान रहे हैं।
ओई गांव के एक निजी खेत में अचानक करीब एक मीटर चौड़ा गड्ढा बन गया। जब ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो उन्हें नीचे पक्की दीवारों से बनी सुरंग जैसी संरचना दिखाई दी। यह खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई।
घटना की जानकारी मिलने पर स्थानीय प्रशासन के साथ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) लखनऊ मंडल की टीम मौके पर पहुंची। सहायक पुरातत्वविद डॉ. मनोज कुमार यादव के नेतृत्व में विशेषज्ञों ने सीढ़ी के सहारे सुरंग के भीतर उतरकर निरीक्षण किया। जांच के दौरान टीम को प्राचीन ईंटें, मिट्टी की सुराही और एक हैंडल वाली धूपदानी मिली।
विशेषज्ञों के शुरुआती आकलन के अनुसार बरामद वस्तुएं कुषाणकालीन हो सकती हैं। इस बीच एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। एएसआई की टीम ने गांव निवासी अशोक प्रताप मौर्य के घर पहुंचकर उनके पास वर्षों से सुरक्षित रखे गए प्राचीन अवशेषों का भी निरीक्षण किया। अशोक प्रताप मौर्य का दावा है कि वे वर्ष 1985 से इन वस्तुओं को संरक्षित किए हुए हैं और ओई भीट पुरातत्व विभाग के अभिलेखों में दर्ज एक ऐतिहासिक स्थल है।
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जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका ने बताया कि एएसआई की प्रारंभिक जांच पूरी हो चुकी है। विस्तृत वैज्ञानिक खुदाई सर्दियों से पहले शुरू की जाएगी। खुदाई के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सुरंग कितनी पुरानी है और इसका ऐतिहासिक महत्व क्या है।
प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर पूरे क्षेत्र को सील कर दिया है। मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया है और ग्रामीणों को गड्ढे के पास जाने से रोका गया है। अब सभी की नजर एएसआई की विस्तृत रिपोर्ट और आगामी खुदाई पर टिकी है, जिससे इस रहस्यमयी सुरंग का असली इतिहास सामने आ सकता है। रायबरेली से रविंद्र सिंह की रिपोर्ट
Location : Raebareli
Published : 30 July 2026, 3:26 PM IST