तुम्हारा VIP कोटा तो फर्जी है: लोकभवन की जाली मुहर से कंफर्म टिकट दिलाने वाले मास्टरमाइंड समेत 5 गिरफ्तार, ऐसे बेनकाब हुआ रैकेट

मुंबई की मलबार हिल पुलिस ने राजभवन (लोकभवन) के फर्जी लेटरहेड और जाली दस्तखत से रेलवे का वीआईपी कोटा हासिल करने वाले रैकेट का भंडाफोड़ किया है। मास्टरमाइंड अमरीश ठक्कर समेत 5 गिरफ्तार, 200 एजेंटों का अंतरराज्यीय नेटवर्क बेनकाब।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 30 July 2026, 3:49 PM IST
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Mumbai: मुंबई की मलबार हिल पुलिस ने रेलवे में इमरजेंसी (वीआईपी) कोटे का अनधिकृत फायदा उठाने वाले एक हाई-प्रोफाइल अंतरराज्यीय रैकेट का भांडाफोड़ किया है। हैरान करने वाली बात यह है कि यह गिरोह किसी छोटे-मोटे अधिकारी के नाम का नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के राजभवन (लोकभवन) के नाम से जारी फर्जी लेटरहेड, नकली सरकारी मुहर और राज्यपाल के निजी सहायक (PA) के जाली हस्ताक्षरों का खुलेआम इस्तेमाल कर रहा था। इस शातिर जालसाजी के मास्टरमाइंड अमरीश ठक्कर समेत कुल 5 आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया है।

मध्य रेलवे के सत्यापन ने खोली फर्जीवाड़े की पोल

इस बड़े गोरखधंधे का पर्दाफाश तब हुआ जब फरवरी 2026 में मध्य रेलवे के चीफ कमर्शियल मैनेजर दफ्तर को राजभवन से आए कुछ सिफ़ारिशी पत्रों पर शक हुआ। रेलवे ने जब लोकभवन प्रशासन से इन पत्रों की पड़ताल कराई, तो अधिकारियों के होश उड़ गए। राजभवन के तत्कालीन PA अभयसिंह देशमुख के जाली हस्ताक्षर और पदनाम की नकली मुहर लगाकर ये पत्र तैयार किए गए थे। लोकभवन से हरी झंडी न मिलने और जालसाजी की पुष्टि होते ही मलबार हिल थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज करवाई गई।

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एलटीटी-राजगीर और छपरा एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों पर था टारगेट

जांच में खुलासा हुआ कि यह सिंडिकेट सबसे पहले यात्रियों के नाम पर लंबी दूरी की ट्रेनों में वेटिंग टिकट बुक कराता था। इसके बाद राजभवन का फर्जी सिफारिशी पत्र बनाकर रेलवे के आपातकालीन कोटे में भेज दिया जाता था, जिससे थर्ड एसी (3rd AC) की सीटें चुटकी बजाते ही कन्फर्म हो जाती थीं। एलटीटी-राजगीर एक्सप्रेस और छपरा एक्सप्रेस जैसी डिमांड वाली ट्रेनों में इसी फर्जीवाड़े के दम पर सीटें हथियाई गईं। सर्विलांस और फर्जी फोन नंबरों की कड़ी जोड़ते हुए पुलिस आखिरकार आरोपियों तक पहुंच ही गई।

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यात्रियों से वसूले जा रहे थे भारी पैसे

पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में जो बात सामने आई है उसने सुरक्षा एजेंसियों के भी कान खड़े कर दिए हैं। इस मास्टरमाइंड अमरीश ठक्कर और शत्रुंजय यादव का नेटवर्क देश के कई राज्यों में फैला हुआ था, जिसमें लगभग 200 दलाल और एजेंट सीधे तौर पर जुड़े थे। ये एजेंट कन्फर्म सीट की गारंटी देकर आम रेल यात्रियों से मनमाना पैसा वसूलते थे। फिलहाल पुलिस यह खंगाल रही है कि इस फर्जीवाड़े से रेलवे को कितना वित्तीय नुकसान हुआ और अब तक कितनी सीटें इस तरह से हड़पी गईं।

Location :  Mumbai

Published :  30 July 2026, 3:49 PM IST

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