रायबरेली में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का सरकार के खिलाफ रोष व्याप्त है। उन्होंने गुरुवार को विकास भवन में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। जिसमें उन्होंने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

रायबरेली में आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों में रोष
रायबरेली: जनपद में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का सरकार के खिलाफ रोष व्याप्त है। मानदेय वृद्धि को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को विकास भवन पर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान आंगनबाड़ी संयुक्त मोर्चा उत्तर प्रदेश के आह्वान पर रायबरेली की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर हुंकार भरी।
विकास भवन परिसर में आयोजित इस एक दिवसीय धरने में सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
धरने का नेतृत्व कर रही जिला अध्यक्ष लीला पांडे ने सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि आज के महंगाई के दौर में मात्र 6000 के मानदेय पर काम करना आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ा संकट बन गया है। इतनी कम राशि में परिवार का भरण-पोषण करना अब मुश्किल होता जा रहा है।
कार्यकर्ताओं का मुख्य दर्द यह है कि उनसे विभाग के सामान्य कार्यों के अलावा SIR (Social Investigation Report) जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण और गंभीर कार्यों में दिन-रात ड्यूटी ली जा रही है। लेकिन उनकी मेहनत की कोई कदर नहीं है।
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कार्यकर्ताओं का आरोप है कि वे सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए चौबीसों घंटे मेहनत करती हैं, लेकिन मानदेय बढ़ाने के नाम पर उन्हें सिर्फ आश्वासन मिलता है।
फील्ड वर्क से लेकर डिजिटल डेटा एंट्री तक, काम का बोझ लगातार बढ़ रहा है, लेकिन आर्थिक स्थिति जस की तस बनी हुई है। मांग उठाई गई है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि की जाए। काम के घंटों और अतिरिक्त जिम्मेदारियों के अनुसार अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जाए। सरकारी कर्मचारी का दर्जा और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान किए जाएं।
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पदाधिकारी वीना सिंह ने कहा कि हम दिन-रात मेहनत करके सरकार की हर योजना को सफल बनाते हैं, लेकिन जब हमारे हक की बात आती है, तो प्रशासन आंखें मूंद लेता है। यह धरना सिर्फ सांकेतिक है, अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और उग्र होगा।