मेरे लिए चूड़ियां लाए थे… अब इन्हें कैसे उतारूं? पति की लाश से मांग भरवाते ही बिलख पड़ी पत्नी

प्रयागराज में एक युवक की अंतिम विदाई के दौरान ऐसा भावुक दृश्य सामने आया जिसने हर किसी को झकझोर दिया। पति की मौत के बाद पत्नी ने एक ऐसी परंपरा निभाई, जिसे देखकर वहां मौजूद लोग अपनी भावनाएं नहीं रोक सके।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 14 June 2026, 8:21 AM IST

Prayagraj: प्रयागराज में शनिवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। सड़क हादसे में जान गंवाने वाले युवक अनुपम गुप्ता की अंतिम विदाई के दौरान उनकी पत्नी प्रिया ने एक ऐसी परंपरा निभाई, जिसने पूरे माहौल को गमगीन कर दिया। पति की अर्थी के पास बैठी पत्नी की चीख-पुकार और दर्द भरे शब्द सुनकर हर कोई भावुक हो उठा।

दरअसल, उन्नाव में हुए भीषण सड़क हादसे में प्रयागराज के चार दोस्तों की मौत हो गई थी। इनमें अनुपम गुप्ता भी शामिल थे। शनिवार सुबह जब उनका शव घर पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी प्रिया बेसुध होकर रोने लगीं और पति के शव के पास बैठ गईं। इसी दौरान परिवार की महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम सुहाग की रस्म पूरी कराई।

अंतिम बार पति के नाम का सिंदूर

परिजनों के अनुसार, एक महिला सिंदूरदान लेकर आई। रिश्तेदारों ने अनुपम की उंगली पर सिंदूर लगाया और फिर प्रिया ने सिर झुकाकर अपनी मांग में अंतिम बार पति के नाम का सिंदूर भरवाया।  सिंदूर भरवाने के बाद प्रिया पति के चरणों में झुक गईं और फूट-फूटकर रोने लगीं। वह बार-बार कह रही थीं, "मेरे लिए चूड़ियां लेकर आए थे, अब इन्हें कैसे उतारूं?" परिवार और रिश्तेदार उन्हें संभालने की कोशिश करते रहे, लेकिन पति को खोने का दुख उनकी आवाज में साफ महसूस हो रहा था।

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मां का दर्द भी छलक पड़ा

सिर्फ पत्नी ही नहीं, अनुपम की मां का दर्द भी लोगों को भावुक कर गया। बेटे के शव से लिपटकर वह बार-बार उसका चेहरा देखने की जिद कर रही थीं। रोते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें एक बार अपने बेटे का चेहरा दिखा दिया जाए। मां की ममता और बेटे को खोने का दर्द देखकर आसपास मौजूद लोगों की आंखें भी भर आईं।

शिमला घूमने निकले थे चार दोस्त

जानकारी के मुताबिक, अनुपम गुप्ता, उदय सिंह, विजय कुमार और अमन कश्यप 12 जून को शिमला घूमने के लिए निकले थे। चारों दोस्त टाटा पंच कार से यात्रा कर रहे थे। रास्ते में उन्नाव के गंगा एक्सप्रेस-वे पर उनकी कार सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से टकरा गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे में चारों दोस्तों की मौके पर ही मौत हो गई। बचाव दल को कार के दरवाजे काटकर शवों को बाहर निकालना पड़ा।

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एक साथ उठीं तीन अर्थियां

शनिवार को प्रयागराज में तीन दोस्तों की अंतिम यात्रा निकाली गई। उदय सिंह को उनके पिता ने मुखाग्नि दी, जबकि विजय कुमार की चिता को उनके बड़े भाई ने अग्नि दी। अनुपम गुप्ता के पिता के पहुंचने के बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया। वहीं चौथे दोस्त अमन कश्यप का अंतिम संस्कार प्रतापगढ़ के पैतृक गांव में किया गया।

पीछे छूट गए सपने और परिवार

अनुपम गुप्ता स्थानीय स्तर पर मोबाइल और इंटरनेट का कारोबार करते थे। उनकी शादी को अभी दो साल ही हुए थे। विजय कुमार टेंट हाउस का व्यवसाय चलाते थे और अपने पीछे पत्नी और तीन बच्चों को छोड़ गए। वहीं उदय सिंह अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे और एक छोटे बच्चे के पिता भी थे।

क्या है 'सुहाग उतारने' की परंपरा?

उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में पति की मृत्यु के बाद अंतिम बार पत्नी की मांग में सिंदूर भरवाने की परंपरा निभाई जाती है। इसे वैवाहिक जीवन के अंतिम प्रतीकात्मक क्षण के रूप में देखा जाता है। इसके बाद मांग का सिंदूर मिटा दिया जाता है और चूड़ियां उतार दी जाती हैं। स्थानीय भाषा में इस रस्म को 'सुहाग उतारना' कहा जाता है।

Location :  Prayagraj

Published :  14 June 2026, 8:20 AM IST