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युवराज मेहता (Img: Google)
Noida: नोएडा सेक्टर-150 में 16 जनवरी की रात सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट के बाद इस केस की आंच सीधे नोएडा प्राधिकरण तक पहुंच गई है। अब प्राधिकरण के छह इंजीनियरों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है, जिससे प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी रिपोर्ट के बाद प्राधिकरण ने एक आंतरिक समिति बनाई थी। इस समिति ने सिविल, ट्रैफिक और विद्युत यांत्रिक विभाग के छह इंजीनियरों के नाम शासन को भेज दिए हैं। इनमें तीन जूनियर इंजीनियरों की सेवा समाप्त करने और एक प्रबंधक को निलंबित कर विभागीय जांच चलाने की सिफारिश की गई है। यह पूरी प्रक्रिया गोपनीय तरीके से ई-मेल के माध्यम से आगे बढ़ाई गई है।
हालांकि, इन सिफारिशों पर अंतिम निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा। प्राधिकरण के अधिकारी इस विषय पर खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। माना जा रहा है कि अगर शासन इन सिफारिशों से सहमत नहीं होता है, तो कार्रवाई का दायरा और भी बढ़ सकता है।
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एसआईटी की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। घटना स्थल पर सड़क सुरक्षा के जरूरी इंतजाम नदारद थे। न तो पर्याप्त रोशनी थी, न ही डिवाइडर पर सफेद पेंट और न ही तीव्र मोड़ के संकेतक बोर्ड या रेडियम ब्लिंकर लगाए गए थे। ये सभी व्यवस्थाएं सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए बेहद जरूरी मानी जाती हैं।
सूत्रों के अनुसार, जांच में सिविल, जल और ट्रैफिक सेल तीनों विभागों की लापरवाही उजागर हुई है। सिविल विभाग की ओर से खुदे हुए प्लॉट को खुला छोड़ दिया गया था, जिससे वह खतरनाक खाई में तब्दील हो गया। वहीं ट्रैफिक विभाग ने सड़क सुरक्षा से जुड़े जरूरी संकेतक और ब्रेकर नहीं लगाए। इन सभी कार्यों की जिम्मेदारी जूनियर इंजीनियर और प्रबंधक स्तर के अधिकारियों पर तय की गई है।
युवराज की मौत के बाद तत्कालीन सीईओ ने ट्रैफिक सेल के एक जूनियर इंजीनियर को सेवा से हटा दिया था। वहीं शासन ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए प्राधिकरण के सीईओ को पद से हटा दिया था। इसके बाद एसआईटी ने कई दौर की जांच कर संबंधित अधिकारियों के बयान दर्ज किए थे।
Location : Noida
Published : 29 April 2026, 8:26 AM IST