महराजगंज के निचलौल में SDM के स्टे आदेश के बावजूद जमीन कब्जाने के आरोप लगे हैं। पीड़ित ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। क्षेत्र में भू-माफियाओं के बढ़ते प्रभाव को लेकर स्थानीय लोग चिंतित हैं।

निचलौल में भूमाफियाओं का दबदबा (Img- Internet)
Maharajganj: उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के निचलौल क्षेत्र में भूमि विवाद का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। यहां एक जमीन को लेकर विवाद ने अब प्रशासनिक आदेशों को भी चुनौती दे दी है, जिससे स्थानीय स्तर पर तनाव का माहौल बन गया है।
निचलौल निवासी प्रत्यूष अग्रवाल ने अपनी जमीन को लेकर उप जिलाधिकारी (SDM) के समक्ष प्रार्थना पत्र दिया था। मामले को गंभीरता से लेते हुए SDM ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश जारी किया। इस आदेश से पीड़ित पक्ष को अस्थायी राहत जरूर मिली, लेकिन विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ।
पीड़ित का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोग SDM के आदेश की अनदेखी करते हुए जमीन की मेड पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। प्रत्यूष अग्रवाल का कहना है कि वह पिछले 20 वर्षों से इस जमीन पर काबिज हैं, इसके बावजूद दबंगों द्वारा उन पर दबाव बनाया जा रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का भी कहना है कि क्षेत्र में भू-माफियाओं का मनोबल बढ़ता जा रहा है। उनका आरोप है कि दबंग खुलेआम नियमों की अनदेखी कर रहे हैं और प्रशासनिक आदेशों का भी पालन नहीं कर रहे। इससे आम नागरिकों में भय और आक्रोश का माहौल बन रहा है।
यह मामला वर्तमान में उत्तर प्रदेश राजस्व अधिनियम 2006 की धारा 116 के तहत SDM न्यायालय में विचाराधीन है। विवाद का मुख्य बिंदु जमीन की मेड पर स्थित एक पेड़ को लेकर है, जिसकी स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है। इसके बावजूद बार-बार कब्जे की कोशिशें की जा रही हैं।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि यह मामला अवैध प्लाटिंग से भी जुड़ा हो सकता है। उनका कहना है कि भू-माफिया मुनाफा कमाने के लिए जमीनों पर नजर गड़ाए हुए हैं और अवैध तरीके से प्लॉटिंग कर रहे हैं। इससे निर्दोष लोगों की जमीनें खतरे में पड़ रही हैं।
पीड़ित प्रत्यूष अग्रवाल और अन्य लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि SDM के आदेश का सख्ती से पालन कराया जाए। साथ ही भूमाफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर क्षेत्र में कानून व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
इस पूरे मामले में प्रशासन की सक्रियता पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो क्षेत्र में भूमि विवाद और बढ़ सकते हैं। छोटे किसानों और आम नागरिकों की जमीनों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।