मुजफ्फरनगर की अदालत ने 13 साल पुराने आंदोलन मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए भारतीय किसान यूनियन से जुड़े 22 किसानों और नेताओं को दोषमुक्त कर दिया। यह फैसला लंबे समय से चले आ रहे विवाद को खत्म करता है और किसानों के लिए राहत लेकर आया है।

22 किसान बरी
Muzaffarnagar: भारतीय किसान यूनियन से जुड़े 22 आंदोलनकारियों को 13 साल पुराने मामले में अदालत ने दोषमुक्त कर दिया है। यह मामला साल 2013 का है। जब मंसूरपुर शुगर मिल पर गन्ना भुगतान न करने का आरोप लगाते हुए भारतीय किसान यूनियन के नेताओं और किसानों ने जोरदार प्रदर्शन किया था।
मुजफ्फरनगर की अदालत ने 13 साल पुराने आंदोलन मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए भारतीय किसान यूनियन से जुड़े 22 किसानों और नेताओं को दोषमुक्त कर दिया।#Muzaffarnagar pic.twitter.com/dxBUrDB0TM
— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) March 7, 2026
उस समय प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे-58 जाम किया और रेल यातायात भी बाधित हुआ। थाना मंसूरपुर पुलिस ने इसके चलते 62 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद से यह मामला लगातार अदालत में विचाराधीन रहा और किसानों को लंबे समय तक कानूनी लड़ाई का सामना करना पड़ा।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता श्रवण कुमार ने बताया कि 62 आरोपियों में से 22 की फाइल अलग की गई थी। ये सभी आरोपी लगातार अदालत में पेश होते रहे और करीब 13 साल तक चली इस कानूनी लड़ाई में लगभग 500 से अधिक तारीखों का सामना किया।
मुजफ्फरनगर की एफटीसी कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान सभी साक्ष्यों और तथ्यों को ध्यान में रखते हुए फैसला सुनाया। अदालत ने 22 आरोपियों को गुण-दोष के आधार पर दोषमुक्त कर दिया। यह फैसला आंदोलनकारियों और उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।
दुदाहेड़ी के ग्राम प्रधान और भाकियू नेता अशोक राठी ने कहा कि यह मामला चंद्रपाल फौजी आदि के नाम से फाइल था। “हमारे वकील साहब श्रवण कुमार ने 22 लोगों की फाइल अलग कर दी थी। कोर्ट ने हम सभी को निर्दोष मानते हुए बरी कर दिया है। बाकी 40 आरोपियों का मामला अभी विचाराधीन है।”
अशोक राठी प्रधान दूधाहेड़ी, मोनू कुमार, जय कुमार, राजवीर, अनिल, पुष्पेंद्र, पप्पू, दुष्यंत त्यागी, जोगेंद्र, सुशील, पप्पन, अमित राठी, ब्रह्मपाल, चरण सिंह, गोपाल, हरबीर, सुशील, राजा, प्रदीप, योगेंद्र, सत्य वृतांत, रमेश।