हिंदी
वाराणसी की जिला अदालतों में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। (फोटो: Pexels)
Varanasi: उत्तर प्रदेश के वाराणसी की जिला अदालतों में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। स्थिति यह है कि कई मुकदमे ऐसे हैं जिनका फैसला पांच दशक बाद भी नहीं हो पाया है। न्याय मिलने में हो रही देरी के कारण कई परिवारों की दो पीढ़ियां अदालतों के चक्कर लगा रही हैं।
अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 1970 से 1980 के बीच दर्ज किए गए 39 मामले आज भी लंबित हैं। इन मुकदमों में अब तक अंतिम फैसला नहीं आया है। इनमें कई मामलों की पैरवी अब मूल पक्षकारों के बजाय उनके परिवार के सदस्य कर रहे हैं। जिला सिविल अदालतों में इस समय 59 हजार से अधिक मामले लंबित हैं। इनमें करीब 41 हजार मामले जमीन, मकान और संपत्ति विवाद से जुड़े हैं। इसके अलावा लगभग 7 हजार अन्य सिविल मामलों का भी निपटारा होना बाकी है।
लंबित मामलों में करीब 11 हजार पर स्टे ऑर्डर लागू है। वहीं 41 मामले हाईकोर्ट में विचाराधीन हैं। इनमें से 19 मामलों में जरूरी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण सुनवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है। इससे न्याय मिलने में और अधिक देरी हो रही है। वर्ष 2018 से 2026 के बीच अदालतों में 94,816 नए मामले दर्ज किए गए। इसी अवधि में 86,270 मामलों का निपटारा किया गया। हालांकि नए मामलों की संख्या निपटाए गए मामलों से अधिक रहने के कारण लंबित मुकदमों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2018, 2022 और 2025 में सबसे अधिक नए मामले दर्ज हुए।
कई पुराने मुकदमों में अब मूल वादी या प्रतिवादी की जगह उनके बेटे, बेटियां या अन्य परिजन अदालत में पैरवी कर रहे हैं। ऐसे आठ मामले हैं जिनमें दो पीढ़ियां करीब 50 वर्षों से न्याय मिलने का इंतजार कर रही हैं।
मुखर्जी बनाम मुश्ताक मामला 12 जनवरी 1970 को दायर हुआ था। इसकी अगली सुनवाई 20 अगस्त को तय है और अब इस मामले की पैरवी दूसरी पीढ़ी कर रही है। डॉ. जे.एम. भोसले बनाम प्रियंवदा तिवारी मामला 20 सितंबर 1971 से लंबित है। अगली सुनवाई 29 जुलाई को निर्धारित है। हरीशचंद्र बनाम भगवती देवी एवं अन्य का मामला वर्ष 1972 में दर्ज हुआ था। इसकी अगली सुनवाई 26 अगस्त को होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने मामलों की अधिक संख्या, स्टे ऑर्डर, रिकॉर्ड की कमी और लगातार बढ़ रहे नए मुकदमों के कारण अदालतों पर दबाव बढ़ रहा है। यदि लंबित मामलों के तेजी से निस्तारण के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में यह बोझ और बढ़ सकता है।
Location : Varanasi
Published : 3 July 2026, 12:55 PM IST