
फतेहपुर: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के असोथर कस्बे में स्थित मोटे महादेव मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और अध्यात्म का अनोखा संगम है। मान्यता है कि महाभारत के युद्ध के बाद अमरत्व प्राप्त कर चुके योद्धा अश्वत्थामा आज भी इस मंदिर में प्रतिदिन सुबह पूजा करने आते हैं। इसी वजह से असोथर को 'अश्वत्थामा की नगरी' कहा जाता है।
ईशान कोण की ओर झुका
जानकारी के मुताबिक, मंदिर का शिवलिंग स्वयंभू है, जो वास्तु शास्त्र के अनुसार ईशान कोण की ओर झुका हुआ है। यह स्थिति अत्यंत दुर्लभ मानी जाती है और इसे ही देखकर श्रद्धालु इस स्थान को 'छोटी काशी' की संज्ञा देते हैं।
स्थान जंगल और श्मशान
लोककथा के अनुसार, सदियों पहले जब यह स्थान जंगल और श्मशान हुआ करता था, तब एक चरवाहे की गाय प्रतिदिन एक टीले पर जाकर अपने आप दूध गिराती थी। जब ग्रामीणों ने उस टीले को खुदवाया तो वहां से शिवलिंग प्रकट हुआ, जिसके बाद इस स्थान की महिमा स्थापित हो गई।
जल के प्रभाव से ठीक होने के बाद...
करीब 200 वर्ष पहले जयपुर के राजा मान सिंह जब अस्वस्थ हो गए थे, तो मोटे महादेव की भभूति और जल के प्रभाव से ठीक होने के बाद उन्होंने इस मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया और इसे भव्य स्वरूप दिया।
विकास कार्यों में निरंतर योगदान
मंदिर के पुजारी आचार्य राजू शुक्ल बताते हैं कि आज भी मंदिर का सौंदर्यीकरण और सेवा कार्य जारी है। क्षेत्रीय सांसद अशोक पटेल द्वारा संगमरमर का कार्य करवाया गया है, वहीं समाजसेवी शिव प्रकाश शुक्ला धार्मिक आयोजनों और विकास कार्यों में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सांस्कृतिक विरासत को गौरवान्वित
श्रावण मास में यहां हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। सुबह होते ही मंदिर परिसर ‘हर हर महादेव’ की गूंज से भक्तिमय वातावरण में डूब जाता है। मोटे महादेव मंदिर न केवल एक पूजास्थल है, बल्कि महाभारत युग की जीवंत स्मृति है, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत को गौरवान्वित करता है।
Location : Fatehpur
Published : 21 July 2025, 4:05 PM IST
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