मिर्जापुर के लहुरियादह स्कूल निर्माण में वन विभाग का रोड़ा, पैमाइश पर उठे गंभीर सवाल

मिर्जापुर के हलिया विकासखंड अंतर्गत लहुरियादह गांव में स्कूल निर्माण पर वन विभाग की आपत्ति से काम रुक गया है। 25.58 लाख रुपये का बजट मिलने के बाद अब डीएम ने संयुक्त जांच टीम गठित कर दो दिन में रिपोर्ट मांगी है।

Updated : 6 October 2026, 8:13 AM IST
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Mirzapur News: जिले के हलिया विकासखंड अंतर्गत लहुरियादह गांव में उच्चीकृत प्राथमिक विद्यालय के निर्माण कार्य में एक बार फिर बड़ा व्यवधान उत्पन्न हो गया है। पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के एक वायरल वीडियो के बाद इस स्कूल के विकास कार्यों में तेजी आई थी, लेकिन अब वन विभाग की आपत्ति के कारण पूर्व माध्यमिक विद्यालय का निर्माण कार्य बीच में ही रुक गया है। इस स्थिति ने स्थानीय प्रशासन और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बजट और जमीन मिलने के बाद भी काम ठप

इस विद्यालय के उच्चीकरण के तहत पूर्व माध्यमिक विद्यालय के निर्माण के लिए प्रशासन द्वारा करीब 0.169 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराई गई थी। इसके साथ ही सरकार की ओर से ₹25.58 लाख का बजट भी स्वीकृत और जारी किया गया था। बजट मिलते ही निर्माण कार्य शुरू हो गया था, जिससे ग्रामीणों और बच्चों में एक उम्मीद जागी थी। लेकिन अब वन विभाग ने प्रस्तावित जमीन पर अपना मालिकाना हक जताते हुए निर्माण कार्य पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है, जिसके चलते काम पर रोक लग गई है।

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संयुक्त जांच टीम का गठन

मामले की गंभीरता को देखते हुए मिर्जापुर के जिलाधिकारी ने तुरंत संज्ञान लिया है। विवाद के समाधान के लिए एक संयुक्त जांच टीम का गठन किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह टीम दो दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट सौंपेगी, और रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक व्यवस्था और मैदानी अमले की कार्यशैली को लेकर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

पैमाइश करने वालों की भूमिका: जब जमीन की पैमाइश की जाती है, तो उसमें राजस्व निरीक्षक से लेकर लेखपाल तक शामिल होते हैं। उनके पास गांव का आधिकारिक नक्शा होता है, जिसमें उसर, बंजर और वन विभाग की जमीन स्पष्ट रूप से चिह्नित होती है।

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चूक या लापरवाही: सरकार बकायदा परीक्षा आयोजित कर लेखपालों की नियुक्ति करती है ताकि वे भूमि की पैमाइश और व्यवस्था के विशेषज्ञ हों। ऐसे में सीमांकन के दौरान यह चूक कैसे हो गई? मौके पर ग्राम प्रधान की मौजूदगी के बावजूद इस तरह की त्रुटि होना प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है।

पारदर्शिता और दोहरे मापदंड: सवाल यह भी उठता है कि जिन अधिकारियों के पास सटीक नक्शा मौजूद होता है, वे जमीन की सही स्थिति का मूल्यांकन करने में असफल क्यों रहे? जो अधिकारी गरीबों के मामलों में तुरंत सख्त कदम उठाते हैं, वे ऐसी प्राथमिक त्रुटियों से कैसे चूक सकते हैं? क्या यह कार्यप्रणाली की कमजोरी है या जानबूझकर स्कूल के निर्माण में रोड़ा अटकाने का कोई प्रयास?

Location :  Mirzapur

Published :  6 October 2026, 8:13 AM IST

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