Mirzapur News: बैनामा हमारा, मुआवजा दूसरों का? विंध्य एक्सप्रेसवे के मुआवजे पर फंसे पेंच को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान

मिर्जापुर में जमीन पर खेती कोई कर रहा है, लेकिन मुआवजे की प्रक्रिया में नाम किसी और का सामने आ रहा है। इसी दावे के साथ सोमवार को बड़ी संख्या में किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे। हाथों में तख्तियां लेकर किसानों ने जिलाधिकारी से मामले में न्याय की मांग की।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 28 September 2026, 7:55 PM IST

Mirzapur: विंध्य एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान मुआवजे में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए मिर्जापुर के कई गांवों के किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे। किसानों का कहना है कि उन्होंने वैध बैनामा कराया और दाखिल-खारिज भी हो चुका है, लेकिन खतौनी में नाम न होने के कारण उन्हें मुआवजा मिलने में परेशानी आ रही है। किसानों ने डीएम से मिलकर इस मामले में न्याय और मुआवजे की मांग की है।

कई गांवों के किसान पहुंचे कलेक्ट्रेट

मिर्जापुर सदर तहसील क्षेत्र के आमघाट, देवरी समेत आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे। किसानों ने प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन के मुआवजे को लेकर अपनी समस्या अधिकारियों के सामने रखी। किसानों का कहना है कि उन्होंने संबंधित जमीन का बैनामा कराया है और बैनामे के बाद दाखिल-खारिज की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद वर्तमान में तैयार किए जा रहे मुआवजे में उनके नाम शामिल नहीं किए जा रहे हैं।

ये भी पढ़ें: Mirzapur News: ट्रेन में 6 साल के बच्चे के साथ पकड़ा गया युवक, GRP की तत्परता से टला बड़ा हादसा

1972-73 में पूरी हुई थी चकबंदी

किसानों के मुताबिक, उनके गांवों में वर्ष 1972-73 में चकबंदी की प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी। उस समय आकार पत्र 23 भाग-1 के तहत आवश्यक कार्रवाई भी पूरी की गई थी।किसानों का कहना है कि इसके बाद वर्ष 2019 में चकबंदी प्रक्रिया को पूरी तरह रोक दिया गया। अब एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई के दौरान पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान कब्जे को लेकर स्थिति विवादित हो गई है।

बैनामा और दाखिल-खारिज के बाद भी मुआवजे पर सवाल

कलेक्ट्रेट पहुंचे किसानों ने बताया कि कई लोगों ने आकार पत्र 23 भाग-1 के आधार पर प्रस्तावित गाटा संख्या वाली जमीन का बैनामा कराया था। बैनामा होने के बाद संबंधित जमीन का दाखिल-खारिज भी कराया गया। किसानों के अनुसार, बैनामे के बाद से वे जमीन पर काबिज हैं और लगातार खेती कर रहे हैं। इसके बावजूद तहसील की खतौनी में उनके नाम दर्ज नहीं हैं। यही वजह है कि अब जमीन अधिग्रहण के दौरान मुआवजे को लेकर उनके सामने समस्या खड़ी हो गई है।

पुराने खाताधारकों के नाम से बन रहा मुआवजा

किसानों का आरोप है कि जिन लोगों के नाम जमीन के बैनामे से पहले खतौनी में दर्ज थे, मौजूदा समय में मुआवजे की प्रक्रिया उन्हीं नामों के आधार पर की जा रही है। किसानों का कहना है कि उन्होंने जमीन का विधिवत बैनामा कराया, उसके बाद दाखिल-खारिज की कार्रवाई भी पूरी हुई और वे जमीन पर कब्जे के साथ खेती कर रहे हैं। ऐसे में मुआवजा पुराने खाताधारकों के बजाय वर्तमान जमीन मालिकों को दिया जाना चाहिए।

हाथों में तख्तियां लेकर पहुंचे किसान

अपनी मांग को लेकर सैकड़ों किसान हाथों में तख्तियां लेकर कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे। किसानों ने अधिकारियों के सामने अपनी समस्या रखते हुए कहा कि जिस जमीन का अधिग्रहण एक्सप्रेसवे के लिए किया जा रहा है, उसका उचित मुआवजा उन्हें मिलना चाहिए। किसानों ने जिलाधिकारी से मामले की जांच कराकर राजस्व रिकॉर्ड और बैनामे से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर उचित कार्रवाई की मांग की।

जिलाधिकारी से न्याय की मांग

किसानों ने कहा कि उन्होंने जमीन खरीदने के बाद संबंधित प्रक्रिया पूरी की और लंबे समय से उस पर खेती करते आ रहे हैं। ऐसे में मुआवजे से उन्हें वंचित किया जाना उनके लिए गंभीर समस्या है। कलेक्ट्रेट पहुंचे किसानों ने जिलाधिकारी से मांग की कि पूरे मामले की जांच कराई जाए और बैनामा धारकों के दस्तावेजों की जांच के बाद विंध्य एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन का मुआवजा वास्तविक हकदारों को दिलाया जाए।

ये भी पढ़ें: Mirzapur: नाबालिग की शादी पर मचा घमासान: असहमति के बावजूद युवक ने मंदिर में लिए सात फेरे

रिकॉर्ड की स्थिति बनी विवाद का कारण

किसानों की शिकायत का मुख्य आधार जमीन के बैनामे, दाखिल-खारिज, कब्जे और खतौनी में दर्ज नामों के बीच कथित अंतर है। किसानों ने प्रशासन से राजस्व रिकॉर्ड की जांच कर मामले का समाधान कराने की मांग की है। फिलहाल किसान अपनी मांग को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे हैं और प्रशासन से पूरे प्रकरण में निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद जता रहे हैं।

Location :  Mirzapur

Published :  28 September 2026, 7:55 PM IST