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महाराजगंज के कोल्हुई कस्बे में भारत फाइनेंसियल इनक्लूजन लिमिटेड में बड़ा गबन सामने आया है, जहां सात फील्ड कर्मचारियों पर महिलाओं से वसूली गई ऋण किस्तें जमा न करने का आरोप है। पीड़ित महिलाओं की शिकायत के बाद मामला उजागर हुआ। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
महाराजगंज में माइक्रोफाइनेंस घोटाला!
Maharajganj: कोल्हुई कस्बे स्थित भारत फाइनेंसियल इनक्लूजन लिमिटेड कंपनी में बड़ा घोटाला सामने आया है। कंपनी के सात फील्ड कर्मचारियों पर महिलाओं से समूह ऋण की किस्तें वसूलने के बाद उस राशि को कंपनी के खाते में जमा न करने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले में गबन की शिकायत पर पुलिस ने सातों कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
जानकारी के अनुसार, कंपनी के फील्ड वर्कर गांव-गांव जाकर गरीब महिलाओं से समूह ऋण की साप्ताहिक और मासिक किस्तें वसूलते थे। महिलाएं नियमित रूप से भुगतान करती रहीं, लेकिन कर्मचारियों ने उक्त धनराशि कंपनी के आधिकारिक खाते में जमा नहीं की। जब बकाया सूची तैयार हुई तो महिलाओं को डिफॉल्टर बताकर नोटिस भेजे गए। इससे पीड़ित महिलाओं में आक्रोश फैल गया।
कई गांवों की महिलाओं ने कंपनी के ब्रांच मैनेजर से शिकायत की। उन्होंने बताया कि वे समय पर किस्तें जमा कर रही थीं, फिर भी उन्हें बकायादार दिखाया जा रहा है। इस पर कंपनी प्रबंधन ने तुरंत आंतरिक जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी साफ नजर आई, जिसके बाद सात कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
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जांच के आधार पर नचिकेत वत्स, रंजीत कुमार, मो. आरिफ, अरविंद, आकास कुमार, आकाश गुप्ता, मनीष मद्धेशिया समेत सात फील्ड वर्करों के खिलाफ कोल्हुई थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 352, 316(2) और 351(3) के तहत गबन का मुकदमा दर्ज किया गया है।
कोल्हुई थाने के एसओ अखिलेश सिंह ने बताया कि मामला दर्ज कर ली गई जांच शुरू कर दी गई है। कंपनी के मैनेजर ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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इस घटना ने पूरे क्षेत्र में माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसी कंपनियों पर कड़ी निगरानी रखी जाए ताकि गरीब महिलाओं के साथ दोबारा धोखाधड़ी न हो सके। महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा और पारदर्शी लेन-देन व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।यह मामला ग्रामीण स्तर पर चल रही वित्तीय सेवाओं में पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है। जांच पूरी होने पर सच्चाई सामने आएगी और दोषियों को सजा मिलने से अन्य कर्मचारियों को भी सबक मिलेगा।