मायावती के खास से पार्टी से बाहर तक, अशोक सिद्धार्थ के सियासी सफर में कब बदला समीकरण

अशोक सिद्धार्थ कभी मायावती के बेहद करीबी नेताओं में शामिल थे और एमएलसी से राज्यसभा तक पहुंचे। उनकी बेटी की शादी आकाश आनंद से होने के बाद दोनों परिवारों का रिश्ता और मजबूत हुआ। लेकिन दिल्ली चुनाव के बाद राजनीतिक समीकरण बदले, अशोक पार्टी से निष्कासित हुए और अब राजनीति से दूरी बना रहे हैं।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 11 September 2026, 8:41 AM IST
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Lucknow: बसपा प्रमुख मायावती के बेहद करीबी नेताओं में रहे अशोक सिद्धार्थ का राजनीतिक सफर अब एक अलग मोड़ पर पहुंच चुका है। कभी पार्टी में अहम जिम्मेदारियां संभालने वाले अशोक न केवल मायावती के भरोसेमंद सिपहसालार रहे, बल्कि पारिवारिक रिश्ता भी जुड़ा। उनकी बेटी डॉ. प्रज्ञा सिद्धार्थ की शादी मायावती के बड़े भतीजे आकाश आनंद से हुई थी।

अशोक सिद्धार्थ की पत्नी सुनीता भी बसपा सरकार के दौरान राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष रह चुकी हैं। ऐसे में राजनीतिक नजदीकी के साथ दोनों परिवारों के बीच पारिवारिक संबंध भी मजबूत माने जाते थे।

एमएलसी से राज्यसभा तक पहुंचा कद

अशोक सिद्धार्थ ने झांसी के बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के महारानी लक्ष्मी बाई मेडिकल कॉलेज से डिप्लोमा किया था। इसके बाद उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में नौकरी की। कन्नौज में नौकरी के दौरान कर्मचारी संगठन की गतिविधियों से जुड़े और इसी दौरान मायावती के संपर्क में आए।

मायावती के कहने पर उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर बसपा के लिए काम करना शुरू कर दिया। वर्ष 2009 में बसपा सरकार के दौरान उन्हें छह वर्ष के लिए विधान परिषद सदस्य बनाया गया। वर्ष 2015 में एमएलसी का कार्यकाल पूरा हुआ और इसके बाद जुलाई 2016 में मायावती ने उन्हें छह वर्ष के लिए राज्यसभा भेजा।

पार्टी में उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया और मायावती ने उन्हें कई राज्यों की जिम्मेदारी भी सौंपी।

दिल्ली चुनाव के बाद बदलने लगा रिश्ता

अशोक सिद्धार्थ और मायावती के रिश्तों में खटास की बड़ी वजह दिल्ली विधानसभा चुनाव में बसपा का प्रदर्शन बताया गया। चुनाव में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद मायावती ने अशोक सिद्धार्थ के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया और उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया।

उनके खिलाफ गुटबाजी और पार्टी विरोधी गतिविधियों को कार्रवाई की वजह बताया गया। कभी मायावती के बेहद करीब रहे अशोक के खिलाफ हुई इस कार्रवाई ने राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा पैदा की।

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आकाश आनंद पर भी पड़ा असर

इस राजनीतिक विवाद का असर मायावती के भतीजे और अशोक सिद्धार्थ के दामाद आकाश आनंद के राजनीतिक सफर पर भी पड़ा। आकाश को पद से हटाने के साथ ही पार्टी से बाहर कर दिया गया।

मायावती ने कहा था कि आकाश आनंद पर उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ और उनकी पत्नी का प्रभाव था, जिसे वह पार्टी के लिए सकारात्मक नहीं मानती थीं। मायावती के मुताबिक अशोक को अपनी गलतियां सुधारने के कई मौके दिए गए, लेकिन उन्होंने पार्टी के मिशन की जगह निजी और पारिवारिक हितों को अधिक महत्व दिया।

करीब 61 साल की उम्र में राजनीति से दूरी

गुरुवार को करीब 61 वर्ष के अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने की बात कही। एक समय मायावती के सबसे भरोसेमंद नेताओं में शामिल रहे अशोक का सफर एमएलसी और राज्यसभा सदस्य तक पहुंचा, लेकिन समय के साथ राजनीतिक समीकरण बदलते गए।

करीबी राजनीतिक सहयोगी से समधी और फिर पार्टी से निष्कासन तक का यह सफर बसपा की आंतरिक राजनीति में आए बड़े बदलावों को भी सामने रखता है।

Location :  Lucknow

Published :  11 September 2026, 8:41 AM IST

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