महराजगंज में LIU में मचा बवाल, SIO प्रभारी, पति-पत्नी हेड कांस्टेबल समेत 5 पर मुकदमा दर्ज

महराजगंज के एलआईयू कार्यालय से जुड़ा एक मामला पुलिस महकमे में हलचल मचा रहा है। कोर्ट के आदेश पर पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। शिकायत, प्रताड़ना और धमकी के आरोपों के बीच अब पुलिस जांच शुरू हो चुकी है।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 2 July 2026, 5:13 PM IST

Maharajganj: महराजगंज जनपद के स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) कार्यालय से जुड़ा एक मामला पूरे पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बन गया है। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी कोर्ट, महराजगंज के आदेश पर एलआईयू के एसआईओ प्रभारी अनिल तिवारी, हेड कांस्टेबल शक्ति तिवारी, उनकी पत्नी हेड कांस्टेबल अर्चना उपाध्याय, हेड कांस्टेबल अवधेश सिंह, मनोज साहनी और विशेष शाखा अधिसूचना विभाग बस्ती के जयराम सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

कोर्ट के आदेश के बाद कोतवाली पुलिस ने विवेचना शुरू कर दी है।

आरोपी अधिकारियों के खिलाफ खोला मोर्चा

मामले के वादी एलआईयू में तैनात रहे मुख्य आरक्षी वेद प्रकाश भारती ने आरोप लगाया है कि कार्यालय में व्याप्त अनियमितताओं की शिकायत करने के बाद आरोपी अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। शिकायत के बाद उन्हें लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और महज एक महीने के भीतर दो बार स्थानांतरित करा दिया गया। वहीं, जिन कर्मचारियों के खिलाफ उन्होंने शिकायत की, वे वर्षों से एक ही स्थान पर जमे रहे।

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प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2022 में उनके पिता की बीमारी के दौरान लिए गए उधार के पैसे को बहाना बनाकर उनके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया। वादी का दावा है कि उस मुकदमे में उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट से स्थगन आदेश (स्टे) भी प्राप्त है।

इस घटना को लेकर लगा गंभीर आरोप

सबसे गंभीर आरोप 18 सितंबर 2025 की घटना को लेकर लगाया गया है। वादी के अनुसार, जब वह अपनी शिकायत लेकर कोतवाली पहुंचे तो गेट के बाहर आरोपियों ने उन्हें घेर लिया। वहां उनके साथ अभद्रता की गई, जातिसूचक शब्दों से सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया और मुकदमा दर्ज कराने पर दुर्घटना कराकर हत्या कराने और झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी गई।

वादी ने घटना के बाद पुलिस अधीक्षक को रजिस्टर्ड डाक से शिकायत भेजी, लेकिन कार्रवाई न होने पर विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी कोर्ट की शरण ली। न्यायालय ने मामले को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए कोतवाली पुलिस को एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया।

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कोर्ट के आदेश के अनुपालन में पुलिस ने बीएनएस की धारा 61(2), 352, 351(3), 3(5) और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जा रही है और विवेचना में सामने आने वाले साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

Location :  Maharajganj

Published :  2 July 2026, 5:03 PM IST