UP News: कैंसर से आनुवंशिक बीमारियों तक की जांच होगी आसान, लोहिया संस्थान में नई तकनीक तैयार; पढ़ें पूरी खबर

लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में दो करोड़ रुपये की लागत से नेक्स्ट-जनरेशन सीक्वेंसिंग (NGS) मशीन स्थापित की गई है। दीपावली के बाद शुरू होने वाली इस सुविधा से कैंसर, आनुवंशिक विकार और गंभीर संक्रमणों की पहचान में मदद मिलेगी। यहां जांच की कीमत 10 हजार से 50 हजार रुपये तक प्रस्तावित है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 14 October 2026, 6:23 AM IST
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Lucknow: कैंसर, आनुवंशिक विकार और गंभीर संक्रमण जैसी बीमारियों की सटीक पहचान के लिए अब मरीजों को बड़ी राहत मिलने वाली है। लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में करीब दो करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक नेक्स्ट-जनरेशन सीक्वेंसिंग (NGS) मशीन स्थापित कर दी गई है। संस्थान के बायोकेमेस्ट्री विभाग में लगाई गई इस मशीन से जांच अगले महीने दीपावली के बाद शुरू करने की तैयारी है। नई सुविधा से जटिल बीमारियों के कारणों को समझने और मरीजों के उपचार की दिशा तय करने में मदद मिलेगी।

डीएनए और आरएनए के बदलावों से बीमारी की पहचान

NGS तकनीक के जरिए मरीजों के डीएनए और आरएनए में मौजूद आनुवंशिक बदलावों का विस्तृत विश्लेषण किया जा सकेगा। इससे कैंसर, आनुवंशिक विकार, दवा प्रतिरोधी टीबी और गंभीर संक्रमणों की पहचान में सहायता मिलेगी। अभी कई जटिल बीमारियों का सही कारण पता लगाने के लिए मरीजों को अलग-अलग जांच करानी पड़ती है। NGS तकनीक एक साथ बड़ी संख्या में आनुवंशिक हिस्सों का विश्लेषण कर सकती है, जिससे बीमारी से जुड़े महत्वपूर्ण बदलावों का पता लगाने में मदद मिलती है।

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बायोकेमेस्ट्री विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष कुलश्रेष्ठ के अनुसार, कैंसर के कुछ मामलों में ट्यूमर कोशिकाओं के आनुवंशिक बदलाव उपचार का विकल्प चुनने में अहम भूमिका निभाते हैं। यह जांच ऐसे बदलावों की पहचान में मदद कर सकती है, जिनके आधार पर लक्षित उपचार की संभावनाओं का आकलन किया जा सकेगा।

प्रदेश का दूसरा सरकारी संस्थान बनेगा लोहिया

NGS जांच शुरू होने के बाद लोहिया संस्थान उत्तर प्रदेश का दूसरा सरकारी चिकित्सा संस्थान होगा, जहां यह सुविधा उपलब्ध होगी। फिलहाल प्रदेश में यह जांच कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान में की जा रही है। नई सुविधा से उन मरीजों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जिन्हें बीमारी का प्रकार स्पष्ट करने या इलाज से जुड़े विकल्पों का आकलन करने के लिए विस्तृत आणविक जांच की जरूरत होती है।

संस्थान के निदेशक प्रो. सीएम सिंह ने बताया कि कई आनुवंशिक बीमारियों के लक्षण बचपन से दिखाई देने लगते हैं, लेकिन उनकी सही पहचान में लंबा समय लग सकता है। कुछ मामलों में बीमारी का पता भी नहीं चल पाता। NGS जांच से संबंधित जीन में मौजूद बदलावों की पहचान करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, कुछ स्थितियों में परिवार में बीमारी के जोखिम का आकलन करने में भी यह तकनीक उपयोगी हो सकती है।

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निजी लैब के मुकाबले 60-70 प्रतिशत तक सस्ती जांच

संस्थान में NGS जांच की प्रस्तावित दर 10 हजार से 50 हजार रुपये तक होगी। संस्थान के मुताबिक, यह निजी पैथोलॉजी लैब की तुलना में करीब 60-70 प्रतिशत सस्ती हो सकती है। इससे गंभीर बीमारियों की जांच के लिए मरीजों की निजी और कॉरपोरेट अस्पतालों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि, जांच की वास्तविक लागत बीमारी और जांच के दायरे के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। नई सुविधा शुरू होने से मरीजों को सरकारी संस्थान में ही उन्नत आनुवंशिक जांच का विकल्प मिलेगा।

Location :  Lucknow

Published :  14 October 2026, 6:23 AM IST

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