नाबालिग गुमशुदगी मामलों पर हाईकोर्ट का अल्टीमेटम, पुलिस कमिश्नर से मांगा गया स्पष्टीकरण, उठे गंभीर सवाल

लखनऊ हाईकोर्ट ने गुमशुदा नाबालिग मामलों में लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने पुलिस कमिश्नर से स्पष्टीकरण मांगा और साप्ताहिक निगरानी के निर्देश दिए। 261 मामलों में 34 अभी भी लापता हैं, रिपोर्ट 3 जुलाई को पेश होगी। कोर्ट ने सख्त निगरानी के आदेश भी दिए।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 10 June 2026, 3:46 PM IST

Lucknow: लखनऊ हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राजधानी में गुमशुदा नाबालिग बच्चों और अन्य लोगों के मामलों की जांच में कथित लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे मामलों में ढिलाई स्वीकार नहीं की जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब राजधानी में ही गुमशुदगी के मामलों की स्थिति चिंताजनक है, तो अन्य जिलों की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

पुलिस कमिश्नर से मांगा गया स्पष्टीकरण

हाईकोर्ट ने लखनऊ के सभी थानों से जुड़े गुमशुदगी मामलों पर पुलिस कमिश्नर से स्पष्टीकरण मांगा है। यह निर्देश 10 जून को मांगी गई रिपोर्ट के संदर्भ में दिया गया। अदालत ने कहा कि मामलों की जांच में देरी और सुस्ती को गंभीरता से लिया जाएगा। इसके साथ ही पुलिस अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया कि सभी मामलों की नियमित और प्रभावी निगरानी हो।

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गुमशुदा मामलों का आंकड़ा पेश

अदालत को बुधवार को यह जानकारी दी गई कि 1 जनवरी 2026 से अब तक लखनऊ में कुल 261 लोग गुम हुए हैं। इनमें बड़ी संख्या नाबालिग लड़के और लड़कियों की है। इनमें से 227 लोगों को पुलिस ने बरामद कर लिया है, जबकि 34 लोग अभी भी लापता हैं।

इसी के साथ यह भी बताया गया कि पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) दीक्षा शर्मा की अधिकारिता वाले नौ थानों में 81 लड़कियों से जुड़े मामले सामने आए हैं, जिनमें अपहरण और बहला-फुसलाकर भगाने की घटनाएं शामिल हैं। इनमें से 66 लड़कियों को बरामद कर लिया गया है, जबकि 15 लड़कियां अब भी गुम हैं।

कोर्ट के कड़े निर्देश और निगरानी आदेश

कोर्ट ने इन मामलों में सख्त नाराजगी व्यक्त करते हुए साप्ताहिक निगरानी के आदेश दिए हैं। साथ ही निर्देश दिया गया है कि सभी लंबित गुमशुदगी मामलों की विस्तृत रिपोर्ट 3 जुलाई को अदालत में प्रस्तुत की जाए। अदालत ने यह भी कहा कि केवल मौजूदा मामलों ही नहीं, बल्कि ऐसे अन्य संभावित मामलों की भी पहचान कर उनकी निगरानी की जाए जो पुलिस की जानकारी में अब तक नहीं आए हैं।

अधिकारियों को कोर्ट में पेश होने का निर्देश

इस मामले की सुनवाई के दौरान लखनऊ पूर्वी जोन के डीसीपी, पुलिस क्षेत्राधिकारी, थानाध्यक्ष, चौकी प्रभारी और विवेचना अधिकारी भी अदालत में उपस्थित हुए। न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की अवकाशकालीन पीठ ने सभी अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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याचिका और आगे की कार्यवाही

यह आदेश एक नाबालिग लड़की की ओर से उसके पिता द्वारा दाखिल याचिका पर दिया गया। याचिका में 12 साल की नाबालिग लड़की की तलाश के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान लड़की की बरामदगी होने पर कोर्ट ने उसे उसके पिता को सौंप दिया।

कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई और रिपोर्ट पेश करने के लिए 3 जुलाई की तारीख निर्धारित की है। साथ ही सभी संबंधित अधिकारियों को लगातार निगरानी और सक्रिय जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

Location :  Lucknow

Published :  10 June 2026, 3:46 PM IST