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लखनऊ अग्निकांड का सच (Img- X)
Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड की गुत्थी को अग्निशमन विभाग ने सुलझा लिया है। दमकल विभाग की तीन दिनों तक चली गहन तफ्तीश में यह साफ हो गया है कि इस चार मंजिला अवैध इमारत में आग कैसे लगी और कैसे उसने विकराल रूप धारण किया।
रिपोर्ट के मुताबिक, आग की शुरुआत पहले तल पर स्थित एक पेट्स शॉप के वेयरहाउस से हुई थी। वहां रखे एक फ्रीजर में अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ, जिससे सबसे पहले फ्रीजर का तार जला। इसके बाद चिंगारी तेजी से इमारत के बाहर लगे विज्ञापनों, बैनर और होर्डिंग्स तक पहुंच गई और देखते ही देखते लपटों ने पूरी बिल्डिंग को घेर लिया।
जैसे ही आग की लपटें बढ़ीं, वहां लगे AC के कंप्रेसर में एक जोरदार विस्फोट हुआ। इस धमाके के बाद आग भूतल (ग्राउंड फ्लोर) पर बने मुख्य प्रवेश द्वार की तरफ बढ़ी, जहां एसी के कई आउटडोर यूनिट्स लगे हुए थे। आग इतनी तेजी से फैली कि एक के बाद एक कुल नौ आउटडोर यूनिट धू-धू कर जलने लगे।
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इसी बीच, प्रवेश द्वार के पास खड़ी एक बुलेट समेत तीन मोटरसाइकिलें भी आग की चपेट में आ गईं। आग की तपिश से इन बाइकों के फ्यूल टैंक एक-एक कर फट गए। ईंधन फैलते ही आग पूरी तरह से बेकाबू हो गई और उसने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे अंदर मौजूद लोगों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) अंकुश मित्तल द्वारा तैयार की गई विस्तृत रिपोर्ट में इमारत की गंभीर खामियों को उजागर किया गया है। जाँच में यह बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई है कि भवन स्वामी वीरेंद्र शुक्ला ने दमकल विभाग से कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) नहीं लिया था।
इसके अलावा, इस बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत में स्मोक सेंसर, फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशामक यंत्र) या पानी के स्प्रिंकलर जैसे बुनियादी अग्नि सुरक्षा उपकरण तक नहीं लगाए गए थे। दमकल विभाग ने रिपोर्ट के साथ इमारत का नजरी नक्शा भी संलग्न किया है, जिसमें दर्शाया गया है कि किस तल पर कौन सा दफ्तर चल रहा था और आग किन परिस्थितियों में फैली।
इस दर्दनाक और खौफनाक अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था, जिसमें कुल 15 लोगों की असमय मौत हो गई। मरने वालों में अधिकांश एक एनिमेशन सेंटर के छात्र-छात्राएं थे, जिनकी उम्र महज 20 से 25 साल के बीच थी। इन युवाओं का भविष्य इस लापरवाही की भेंट चढ़ गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। इस मामले में भवन स्वामी सहित कई ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की जा चुकी है। दमकल विभाग की इस 3-दिवसीय गहन रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद एसआईटी जल्द ही अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
Location : Lucknow
Published : 26 June 2026, 8:44 AM IST