25 साल तक सिर्फ फाइलों में रही… अब 500 साल पुरानी लोदी काल की पहली मस्जिद खंडहर बन गई, बचाने की उठी नई मांग

आगरा की 500 साल पुरानी लोदी काल की पहली मस्जिद आज खंडहर बनने की कगार पर है। कभी इसके संरक्षण की बड़ी योजना बनी थी, लेकिन समय के साथ सब अधूरा रह गया। अब दो गुंबद गिर चुके हैं और इतिहास प्रेमियों ने फिर इसे बचाने की आवाज उठाई है।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 30 July 2026, 4:51 PM IST
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Agra: आगरा के सिकंदरा स्थित होली पब्लिक स्कूल के सामने मौजूद करीब 500 साल पुरानी लोदी काल की पहली मस्जिद आज अपनी पहचान बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। कभी इस ऐतिहासिक इमारत को संरक्षित करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन समय के साथ वह कोशिशें भी फाइलों में ही सिमट गईं। अब हालत यह है कि मस्जिद के तीन में से दो गुंबद गिर चुके हैं और पूरी इमारत तेजी से खंडहर में बदलती जा रही है।

25 साल पहले शुरू हुई थी संरक्षण की पहल

साल 2001-02 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के तत्कालीन अधीक्षण पुरातत्वविद केके मुहम्मद ने इस मस्जिद को अडॉप्ट हेरिटेज स्कीम में शामिल कर इसके संरक्षण की योजना बनाई थी। उस समय संरक्षण सहायक डॉ. आरके दीक्षित ने भी निरीक्षण कर मरम्मत और संरक्षण के लिए विस्तृत रिपोर्ट तैयार की थी। यहां तक कि आईटीसी होटल ग्रुप ने भी इस धरोहर को बचाने में रुचि दिखाई थी।

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लेकिन अधिकारियों के तबादले के बाद यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी और धीरे-धीरे यह ऐतिहासिक धरोहर उपेक्षा का शिकार हो गई। समय के साथ इसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई।

2010 में विवाद के बाद फिर छूटा मामला

साल 2010 में इस मस्जिद में तीन दिन तक नमाज पढ़े जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। उस समय तत्कालीन सांसद के नेतृत्व में विरोध हुआ, जिसके बाद यहां नमाज अदा करने पर रोक लगा दी गई। इसके बाद मस्जिद का मुद्दा धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला गया और संरक्षण की दिशा में भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

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इतिहासकार और पर्यटन विशेषज्ञ बोले- इसे बचाना जरूरी

आगरा अप्रूव्ड गाइड एसोसिएशन के अध्यक्ष का कहना है कि यह केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लोदी काल की वास्तुकला और आगरा के 500 साल पुराने इतिहास की महत्वपूर्ण पहचान है। अगर इसे समय रहते नहीं बचाया गया तो आने वाली पीढ़ियां इस धरोहर को केवल तस्वीरों में ही देख पाएंगी।

वहीं टूरिज्म गिल्ड के पूर्व अध्यक्ष का कहना है कि पुरातत्व संरक्षण के लिए काम करने वाले एनजीओ और संस्थाओं को अब आगे आना चाहिए। उनका मानना है कि केवल ताजमहल और यूनेस्को धरोहरों तक सीमित रहने के बजाय ऐसी ऐतिहासिक इमारतों को भी बचाने की जरूरत है।

Location :  Agra

Published :  30 July 2026, 4:51 PM IST

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