कानपुर किडनी कांड: 12वीं पास रोहित निकला मास्टरमाइंड, 1000 पन्नों की चार्जशीट में खुला सच

कानपुर के चर्चित किडनी ट्रांसप्लांट मामले में पुलिस ने विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है। जांच में कई आरोपियों की भूमिका, जुटाए गए सबूत, गवाहों के बयान और मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों का उल्लेख किया गया है। जानें क्या है पूरा मामला

Updated : 1 July 2026, 4:34 PM IST
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Kanpur: शहर के चर्चित अवैध किडनी ट्रांसप्लांट मामले में पुलिस ने करीब 1000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में डॉक्टर दंपती समेत 14 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं। पुलिस ने मामले में संगठित अपराध की धारा भी बढ़ाई है। जांच में लखनऊ के रहने वाले 12वीं पास रोहित उर्फ राहुल तिवारी को पूरे रैकेट का सरगना बताया गया है।

दस्तावेज, चैट और कॉल डिटेल बने अहम सबूत

पुलिस की चार्जशीट में छापेमारी के दौरान बरामद दस्तावेज, आरोपियों की आपसी चैट, कॉल डिटेल रिपोर्ट, होटल में ठहरने की फुटेज और डोनर-रिसीवर समेत 36 गवाहों के बयान शामिल किए गए हैं। पुलिस का दावा है कि इन्हीं सबूतों के आधार पर रैकेट की कड़ियां जोड़ी गई हैं।

आहूजा अस्पताल में छापे के बाद खुला था मामला

मसवानपुर चौराहा स्थित आहूजा अस्पताल में 29 मार्च को पुलिस ने छापा मारकर इस रैकेट का खुलासा किया था। आरोप है कि बेगूसराय के आयुष की किडनी मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर को ट्रांसप्लांट की गई थी। 31 मार्च को दरोगा मुकेश कुमार की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया था।

डॉक्टर दंपती समेत कई नाम चार्जशीट में

मामले में आहूजा अस्पताल के संचालक डॉ. सुरजीत आहूजा और उनकी पत्नी डॉ. प्रीति आहूजा समेत कई लोगों के नाम सामने आए थे। पुलिस के मुताबिक, अस्पताल संचालकों और अन्य आरोपियों को रैकेट के सदस्य के तौर पर पेश किया गया है।

डीसीपी वेस्ट के अनुसार, किडनी कांड में कुल 19 आरोपियों के नाम सामने आए हैं। फिलहाल जेल भेजे गए 14 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया है। इनमें डॉ. सुरजीत आहूजा, डॉ. प्रीति आहूजा, शिवम अग्रवाल, राम प्रकाश कुशवाहा, नरेंद्र सिंह, कुलदीप सिंह राघव, राजेश कुमार तोमर, परवेज सैफी, मुदस्सर अली, साहिल, परवेज सेती, रोहित और नवीन पांडेय समेत अन्य आरोपी शामिल हैं। फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

नया नंबर लेकर करता था डील

पुलिस जांच में सामने आया है कि रोहित उर्फ राहुल तिवारी बेहद सतर्क तरीके से रैकेट संचालित करता था। वह हर ट्रांसप्लांट से पहले नया मोबाइल नंबर लेता और ऑपरेशन पूरा होते ही उसे बंद कर देता था। पुलिस का कहना है कि पकड़े गए कई डॉक्टर और सहयोगी इसी नेटवर्क के लिए काम कर रहे थे।

आयुष बना केस की सबसे अहम कड़ी

इस पूरे केस में आयुष को मुख्य गवाह बनाया गया है। पुलिस के मुताबिक, आयुष को आहूजा अस्पताल से बरामद किया गया था और उसकी किडनी ट्रांसप्लांट होने की मेडिकल रिपोर्ट भी मौजूद है। जांच एजेंसी का मानना है कि आयुष की गवाही अदालत में केस को मजबूत करेगी।

50 हजार रुपये ने खोल दिया पूरा रैकेट

किडनी ट्रांसप्लांट के बदले आयुष को 10 लाख रुपये देने की बात तय हुई थी। आरोप है कि उसे 9.50 लाख रुपये दिए गए, लेकिन बाकी 50 हजार रुपये नहीं मिले। भुगतान को लेकर विवाद बढ़ा तो आयुष ने पुलिस से शिकायत कर दी। इसी शिकायत ने पूरे अवैध किडनी रैकेट का पर्दाफाश कर दिया।

विदेशी महिला के ऑपरेशन की भी जांच

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि दिसंबर 2025 में साउथ अफ्रीका की अरेबिका नाम की महिला का भी आहूजा अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था। बाद में उसे कार से दिल्ली भेजा गया, जहां उसकी मौत हो गई थी। पुलिस इस बिंदु को भी जांच का अहम हिस्सा मान रही है।

अब अदालत में होगी अगली लड़ाई

करीब 1000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामला अदालत में आगे बढ़ेगा। पुलिस का दावा है कि दस्तावेजों, डिजिटल सबूतों और गवाहों के बयान के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मजबूत केस तैयार किया गया है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद इस रैकेट से जुड़े और खुलासे हो सकते हैं।

 

Location :  Kanpur

Published :  1 July 2026, 4:34 PM IST

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