पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर की गिरफ्तारी पर जांच अधिकारी को फटकार, देवरिया कोर्ट ने कहा- अब हम करेंगे मॉनिटरिंग

देवरिया कोर्ट में पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की पेशी के दौरान जांच की कमजोरी उजागर हुई। सबूतों के अभाव में कोर्ट ने विवेचक को फटकार लगाई और मामले की जांच कोर्ट मॉनिटरिंग में लेने के संकेत दिए।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 3 January 2026, 4:23 PM IST
google-preferred

Deoria: जेल, अनशन और सियासत के बीच फंसे एक पूर्व आईपीएस अफसर की पेशी ने शनिवार को देवरिया की अदालत में सनसनी पैदा कर दी। धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में बंद अमिताभ ठाकुर को जब सीजेएम कोर्ट में लाया गया, तो सवाल सिर्फ उनकी जमानत का नहीं था, बल्कि पूरी जांच की साख कटघरे में खड़ी दिखी। करीब आधे घंटे चली सुनवाई में जांच अधिकारी के पास न सबूत थे और न ही गिरफ्तारी का ठोस आधार, जिस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया।

कोर्ट में जमानत पर सुनवाई

देवरिया जिला कारागार में बंद पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की जमानत याचिका पर सीजेएम कोर्ट में सुनवाई हुई। लखनऊ से आए जांच अधिकारी अदालत में कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सके। इस पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने विवेचक को कड़ी फटकार लगाई और साफ कहा कि अब तक की विवेचना में ऐसा कुछ भी सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो सके कि गिरफ्तारी जरूरी थी या आरोप प्रथम दृष्टया मजबूत हैं। कोर्ट ने संकेत दिए कि अब इस मामले की जांच कोर्ट की निगरानी में होगी।

जांच पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान जज ने जांच अधिकारी से गिरफ्तारी के आधार, उपलब्ध साक्ष्यों और जांच की दिशा को लेकर कई सवाल किए। लेकिन किसी भी सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका। इस पर कोर्ट ने विवेचना की गुणवत्ता और निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए, जिससे जांच एजेंसी की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई।

पेशी के बाद अमिताभ का बयान

जेल से भूख हड़ताल के बीच अदालत पहुंचे अमिताभ ठाकुर ने कहा कि उनके खिलाफ चुनिंदा कार्रवाई की गई है। उनका आरोप है कि असली और प्रभावशाली आरोपियों को बचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जैसे ही उन्होंने पूर्व सांसद धनंजय सिंह और कुछ बड़े नेताओं से जुड़े तथ्यों को सार्वजनिक किया, उनके खिलाफ साजिश शुरू हो गई और मुकदमे दर्ज कर दिए गए।

‘मुझे एनकाउंटर का डर था’

पूर्व आईपीएस ने दावा किया कि मुकदमा दर्ज होने के अगले ही दिन रात करीब 2 बजे अचानक उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। जिस तरह रात के सन्नाटे में उन्हें उठाया गया, उससे उन्हें एनकाउंटर का डर लगने लगा था। उन्होंने कहा कि कोडीन कफ सिरप मामले में उन्हें फंसाया गया है और इस पूरे नेटवर्क में शिवम जायसवाल सिर्फ एक मोहरा है।

25 साल पुराने केस पर बहस

अमिताभ ठाकुर के वकील अभिषेक शर्मा ने कोर्ट में दलील दी कि मामला 25 साल पुराना है। इतने लंबे समय तक जांच एजेंसियां कोई ठोस सबूत नहीं जुटा पाई और अब अचानक गिरफ्तारी कर दी गई, जो न्यायसंगत नहीं है।

आगे की राह

कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 6 जनवरी तय की है। अमिताभ ठाकुर ने बताया कि न्यायालय के आश्वासन के बाद उन्होंने अपना आमरण अनशन 15 जनवरी तक स्थगित कर दिया है। जेल में उनकी नियमित मेडिकल जांच भी जारी है।

Location : 
  • Deoria

Published : 
  • 3 January 2026, 4:23 PM IST

Advertisement
Advertisement