गोरखपुर के सिकरीगंज में एक प्राइवेट हॉस्पिटल में हुए मोतियाबिंद कैंप के बाद फैले गंभीर इंफेक्शन की वजह से नौ मरीजों की आंखें निकालनी पड़ीं, जबकि कई और लोगों की आंखों की रोशनी चली गई। बताया जा रहा है कि अठारह मरीज इससे प्रभावित हैं।

मोतियाबिंद कैंप में कई लोगों की आंखें गई (Img: Google)
Gorakhpur: जिले के सिकरीगंज स्थित एक निजी अस्पताल में आयोजित मोतियाबिंद ऑपरेशन कैंप के बाद फैले भीषण संक्रमण ने स्वास्थ्य व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। ऑपरेशन के बाद 9 मरीजों की आंखें निकालनी पड़ीं, जबकि कई अन्य की रोशनी चली गई। घटना सामने आते ही प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, जानकारी के मुताबिक 1 फरवरी को न्यू राजेश हाइटेक हॉस्पिटल में आई कैंप लगाकर करीब 30 मरीजों का मोतियाबिंद ऑपरेशन किया गया था। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के 24 घंटे के भीतर ही कई मरीजों की आंखों में तेज दर्द, सूजन, खून आना और मवाद जैसी गंभीर शिकायतें शुरू हो गईं।
धीरे-धीरे 18 मरीजों में गंभीर संक्रमण की पुष्टि हुई और स्थिति बिगड़ती चली गई।
इन्दारी निवासी संजय सिंह ने बताया कि उनके पिता का ऑपरेशन इसी कैंप में हुआ था। ऑपरेशन के बाद आंख से लगातार खून आने लगा। पहले वाराणसी, फिर दिल्ली में इलाज कराया गया, लेकिन सुधार नहीं हुआ। अंततः डॉक्टरों ने आंख निकालने की सलाह दी। संजय का कहना है कि उनके परिवार के दो लोगों का ऑपरेशन हुआ था और दोनों की हालत गंभीर हो गई।
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रेखा नामक महिला ने बताया कि उनकी सास का ऑपरेशन भी इसी कैंप में हुआ था। कुछ ही घंटों में तेज दर्द और मवाद की शिकायत शुरू हो गई। उन्होंने दावा किया कि 18 मरीजों की हालत बिगड़ी है और कई अलग-अलग शहरों के सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में भर्ती हैं।
प्रारंभिक जांच और कल्चर रिपोर्ट में गंभीर संक्रमण की पुष्टि हुई है। जिलाधिकारी दीपक मीणा ने कहा कि मामले को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल को सील कर मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए गए हैं। दोषी पाए जाने पर सख्त विधिक कार्रवाई और पंजीकरण निरस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने बताया कि जिला स्तरीय कमेटी गठित कर जांच कराई जा रही है। बीआरडी मेडिकल- कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी टीम ने भी निरीक्षण किया है। प्रथम दृष्टया संक्रमण नियंत्रण में लापरवाही की आशंका है। एहतियातन नेत्र विभाग और संबंधित ऑपरेशन थिएटर को सील कर दिया गया है।
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घटना ने निजी अस्पतालों की निगरानी व्यवस्था और सर्जिकल प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई परिवारों की जिंदगी में अंधेरा छा गया है। पीड़ित परिजन न्याय और मुआवजे की मांग कर रहे हैं, जबकि प्रशासन ने जांच रिपोर्ट के आधार पर कठोर कार्रवाई का भरोसा दिलाया।