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पुलिस ने किया गैंग का खुलासा
गाजियाबाद: साइबर क्राइम पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए एक इंटरनेशनल साइबर ठग गैंग के 7 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी बीमा पॉलिसी बेचने के नाम पर फर्जी दस्तावेज और कूटरचित तरीकों से लोगों को ठगते थे। गिरोह अब तक करीब 4.50 करोड़ रुपये की ठगी कर चुका था।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता को मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस ने आरोपियों के पास से 26 मोबाइल फोन, 6 बैंक चेकबुक और करीब 2 लाख नकद बरामद किए हैं। आरोपियों ने देशभर में कई लोगों को ठगकर करोड़ों रुपये हड़पे हैं।
नोएडा की बीमा कंपनी से शुरू हुई ठगी की कहानी
पूछताछ में सामने आया कि गिरोह का मास्टरमाइंड अमन अग्रवाल पहले नोएडा की एक निजी बीमा कंपनी में काम करता था। वहीं पर उसकी मुलाकात राहुल शर्मा से हुई। दोनों ने मिलकर कंपनी के ग्राहकों की पर्सनल डिटेल और पॉलिसी संबंधी जानकारी जुटा ली और नौकरी छोड़ दी। इसके बाद दोनों ने कुछ अन्य साथियों के साथ मिलकर ठगी का नेटवर्क खड़ा कर लिया।
कैसे करते थे साइबर फ्रॉड?
गिरोह के सदस्य फर्जी सिम कार्ड से पॉलिसी धारकों से संपर्क करते थे। उन्हें पुरानी बीमा पॉलिसी में ज्यादा रिटर्न का लालच देकर झांसे में लेते थे। उनके पास पहले से मौजूद डाटा के कारण पीड़ित को शक नहीं होता था। वे उन्हें नई पॉलिसी का प्रस्ताव देते और तय बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर कराने को कहते। इसके बाद Canva जैसे सॉफ्टवेयर से नकली पॉलिसी बनाकर फर्जी मुहर के साथ भेज दी जाती थी।
बिल्कुल पेशेवर तरीके से चल रहा था गिरोह
पुलिस का कहना है कि ये गिरोह बेहद सुनियोजित और पेशेवर ढंग से काम कर रहा था। उनके पास अलग-अलग राज्यों के बैंक खातों का नेटवर्क और हाई-टेक डिवाइस मौजूद थे, जिससे फ्रॉड करना आसान होता था।
पुलिस का बयान
एडिशनल कमिश्नर आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि आरोपियों ने टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग कर बीमा पॉलिसी के नाम पर ठगी की एक संगठित व्यवस्था बना रखी थी। हमारी टीम ने गंभीरता से जांच कर इस गैंग को पकड़ा है। आगे भी इनकी ठगी का दायरा और नेटवर्क खंगाला जा रहा है। साथ में पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल या पॉलिसी ऑफर पर तुरंत विश्वास न करें। किसी भी बीमा प्रस्ताव की जांच संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या टोल-फ्री नंबर से जरूर करें।
Location : Ghaziabad
Published : 27 June 2025, 7:13 PM IST