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बदायूं के सहसवान स्थित एक अस्पताल में हैरान करने वाला मामला सामने आया, जहां एक युवक की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में ‘बच्चेदानी’ दर्ज कर दी गई। पेट दर्द की जांच कराने पहुंचे युवक और उसके परिवार ने इसे गंभीर लापरवाही बताया है। अस्पताल ने इसे टेम्पलेट की गलती कहा, लेकिन परिजन जांच और कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं।
सहसवान स्थित रामनिवास अस्पताल
Budaun: उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के सहसवान स्थित रामनिवास अस्पताल में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पेट दर्द की शिकायत लेकर पहुंचे एक युवक की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में बच्चेदानी (uterus) दर्ज कर दी गई।
जानकारी के अनुसार, युवक को पिछले कई दिनों से पेट में दर्द था, जिसके चलते वह अस्पताल पहुंचा। डॉक्टर की सलाह पर उसका अल्ट्रासाउंड कराया गया। लेकिन जब रिपोर्ट हाथ में आई, तो उसमें "uterus is normal in size and echotexture" जैसी लाइनें लिखी थीं जो आमतौर पर महिला मरीजों की रिपोर्ट में होती हैं।
रिपोर्ट देखते ही युवक और उसके परिजन हैरान रह गए। उन्हें समझ नहीं आया कि पुरुष मरीज की रिपोर्ट में महिला प्रजनन अंग का जिक्र कैसे हो सकता है।
मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन की ओर से सफाई दी गई। शुरुआती प्रतिक्रिया में स्टाफ ने इसे क्लेरिकल या टेम्पलेट एरर बताया। अस्पताल का कहना है कि अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट तैयार करते समय किसी महिला मरीज की पुरानी रिपोर्ट का टेम्पलेट कॉपी-पेस्ट रह गया होगा, जिसकी वजह से यह गलती हुई।
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हालांकि, इस जवाब से पीड़ित परिवार संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि ऐसी लापरवाही बेहद गंभीर है और इससे मरीज के इलाज पर गलत असर पड़ सकता है।
पीड़ित परिवार ने इस मामले को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) बदायूं से शिकायत करने की बात कही है। परिजनों का कहना है कि इस तरह की गलती से मरीजों का भरोसा टूटता है और स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच, दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए सख्त कदम उठाने की मांग की है।
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विशेषज्ञ क्या कहते हैं: रेडियोलॉजी विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल रिपोर्टिंग में टेम्पलेट आधारित सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल आम है। यदि रिपोर्ट फाइनल करने से पहले ठीक से क्रॉस-चेक न किया जाए, तो इस तरह की गलतियां हो सकती हैं।
फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही को लेकर चिंता जता रहे हैं।